राष्ट्रीय राजनीति
4 घंटे पहले
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राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश से पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन नामांकन-पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) के दौरान खारिज कर दिया गया। इसके साथ ही राज्य की तीसरी राज्यसभा सीट का मुकाबला लगभग एकतरफा हो गया है।
रिटर्निंग ऑफिसर ने बारीकी से जांच करने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन फॉर्म निरस्त किया। बताया गया कि नटराजन ने अपने नामांकन-पत्रों में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छिपा ली थी। नामांकन खारिज होने के बाद भाजपा प्रत्याशी महेश केवट की जीत की संभावना और प्रबल हो गई है। केवट राज्य के मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं।
वह मामला, जो नटराजन पर भारी पड़ा
अदालती दस्तावेजों से जिन घटनाओं की समय-रेखा सामने आई, उसने कांग्रेस खेमे में हलचल मचा दी। इसी केस की जानकारी न देना नामांकन रद्द होने की वजह बना। आइए, इस मामले से जुड़ी तारीखों पर एक नजर डालते हैं।
11 मई, 2025 — कथित अपराध की तारीख
शिकायतकर्ता ए. श्रीलता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया।
20 अगस्त, 2025 — औपचारिक शिकायत दर्ज
ए. श्रीलता ने हैदराबाद में ‘चौथे अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट’ की अदालत में मीनाक्षी नटराजन (आरोपी नंबर 4) तथा अन्य के विरुद्ध औपचारिक शिकायत (2025 की शिकायत संख्या) दर्ज कराई। शिकायत में नटराजन पर BNS अधिनियम की धाराओं 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के अंतर्गत आरोप लगाए गए।
17 सितंबर, 2025 — न्यायिक समन जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को ‘प्रतिवादी को नोटिस’ जारी किया। समन में उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया गया कि वे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हों और अपना जवाब दाखिल करें।
24 अक्टूबर, 2025 — नटराजन का जवाब
मीनाक्षी नटराजन के वकील ने अदालत में जवाबी हलफनामा प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए पूरी शिकायत को “राजनीतिक प्रतिशोध” से प्रेरित करार दिया और इसे खारिज किए जाने की मांग की।
17 नवंबर, 2025 — सुनवाई की तारीख
अदालत ने मामले को खारिज नहीं किया, बल्कि सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी, जो अब भी जारी है।
तीन सीटों का गणित और कांग्रेस का घटता आंकड़ा
भाजपा ने तीन सीटों पर होने वाले इस चुनाव को देखते हुए पहले दो उम्मीदवारों की घोषणा की थी। बाद में 7 जून को तीसरी सीट के लिए महेश केवट को मैदान में उतारने का ऐलान किया गया। अब नटराजन का नामांकन रद्द होने से केवट की जीत तय मानी जा रही है।
वर्तमान में मध्य प्रदेश की कुल 230 सदस्यीय विधानसभा में प्रभावी वोटों की संख्या 228 है। इसमें भाजपा के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक हैं। बीना से विधायक निर्मला सप्रे के मतदान को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने और उनका झुकाव भाजपा की ओर होने, तथा विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर लगी रोक जैसी तकनीकी वजहों से कांग्रेस का प्रभावी आंकड़ा घटकर 62 पर आ गया है।
राज्यसभा की तीन सीटों पर हर उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है। इस लिहाज से दो सीटें जीतने के लिए भाजपा को 116 वोट चाहिए। कुल 164 में से 116 वोट देने के बाद भाजपा के पास 48 वोट बचेंगे। तीसरी सीट पर जीत के लिए उसे 58 वोट चाहिए, यानी भाजपा को 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी।
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