राष्ट्रीय राजनीति
4 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद बढ़ीं मुश्किलें
तहलका पत्रिका के संस्थापक और पूर्व संपादक तरुण तेजपाल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई हैं। एक महिला सहकर्मी के साथ हुए यौन उत्पीड़न के बहुचर्चित मामले में, देश की सर्वोच्च अदालत से किसी भी प्रकार की फौरी राहत न मिलने के बाद तेजपाल ने सोमवार को गोवा की अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने इस मामले में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें सीधा जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया है।
कानूनी रास्ता बंद होने के बाद सरेंडर
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए राहत देने से साफ इनकार किए जाने के बाद, तरुण तेजपाल के सामने आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई अन्य कानूनी विकल्प शेष नहीं बचा था। यह पूरा मामला गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित थिंक फेस्ट के दौरान उनकी ही एक जूनियर सहयोगी के साथ कथित दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है। इस मामले को लेकर तेजपाल पिछले काफी लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और अदालत के चक्कर काट रहे हैं।
लंबे समय से जारी है कानूनी संघर्ष
इस मामले का इतिहास काफी पुराना है। निचली अदालत द्वारा सुनाए गए पूर्व फैसले को चुनौती देने के बाद यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। इस दौरान जांच और सुनवाई की लंबी प्रक्रिया ने देश भर में काफी चर्चा बटोरी थी। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना सख्त रुख अख्तियार कर लिया है, तो तरुण तेजपाल के सरेंडर और उनके जेल जाने से इस मामले में एक बार फिर नया कानूनी मोड़ आ गया है। फिलहाल, तहलका के पूर्व संपादक को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है और अब उन्हें अपनी आगे की रातें जेल में ही काटनी होंगी।
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