TMC को बड़ा झटका, सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बड़ाइक ने थाम लिया BJP का दामन भारत एक महीने पहले 66
तृणमूल कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं ने पार्टी से बगावत कर भारतीय जनता पार्टी का रुख किया है। इन नेताओं ने पार्टी छोड़ने के पीछे की वजहों का खुलासा करते हुए ममता बनर्जी के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पार्टी में शामिल होने की प्रक्रिया

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा बदलाव देखने को मिला जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन कद्दावर नेताओं, सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बड़ाइक ने आधिकारिक तौर पर 9 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली। कोलकाता के साल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इन नेताओं का पार्टी में स्वागत किया। इन नेताओं को भाजपा का झंडा सौंपा गया और उम्मीद जताई गई कि उनके अनुभव से राज्य में पार्टी की स्थिति और अधिक मजबूत होगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ममता बनर्जी की पार्टी अपनी अंदरूनी कलह और विधानसभा चुनावों के बाद के हालातों से जूझ रही है।

नेताओं ने क्यों चुनी भाजपा की राह

भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद इन तीनों नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के अपने कारणों को विस्तार से साझा किया। उनके बयानों से पार्टी के अंदर व्याप्त असंतोष की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी:

  • सुखेंदु शेखर रॉय: उन्होंने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि आर जी कर मामले के दौरान संसद में उन्होंने अकेले आवाज उठाई थी। उनके अनुसार, देश में कुल 800 सांसद होने के बावजूद किसी अन्य ने इस मुद्दे पर चुप्पी नहीं तोड़ी। रॉय ने आरोप लगाया कि आवाज उठाने के कारण ही उन्हें लाल बाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में बार-बार पूछताछ के लिए बुलाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गई थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तृणमूल कांग्रेस में भ्रष्टाचार चरम पर है, जिसके खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने भाजपा का दामन थामा है।
  • सुष्मिता देव: उन्होंने अपने फैसले के पीछे विकास को मुख्य आधार बताया। सुष्मिता ने कहा कि उन्होंने भाजपा की कार्यप्रणाली और विकास के विजन को देखते हुए यह कदम उठाया है। उन्होंने साफ किया कि टीएमसी छोड़ने का उनका निर्णय राजनीतिक और व्यक्तिगत दोनों था। उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसी स्थिति में काम नहीं कर सकती थीं जहाँ उन्हें दो नावों पर सवार रहना पड़े। हालांकि, उन्होंने ममता बनर्जी पर सीधे व्यक्तिगत टिप्पणी करने से परहेज किया।

असंतोष की पृष्ठभूमि

इन तीनों नेताओं ने भाजपा में आने से कुछ हफ़्ते पहले ही तृणमूल कांग्रेस और राज्यसभा की अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था। सबसे पहले सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने पदों से हटने का ऐलान किया, जिसके बाद प्रकाश चिक बड़ाइक ने भी अपना त्यागपत्र सौंपा। बड़ाइक ने अपने इस्तीफ़ा पत्र में संक्षिप्त रूप से स्पष्ट किया था कि वह राज्यसभा की सदस्यता से तत्काल प्रभाव से मुक्त होना चाहते हैं। इन इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची भगदड़ को उजागर कर दिया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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