अंबिकापुर बाल सुधार गृह में बड़ी सेंध, लोहे की रॉड मोड़कर फरार हुए 13 बाल कैदी छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 66
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से 13 नाबालिगों के भागने से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। एक महीने के भीतर दूसरी बार हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंबिकापुर में सुरक्षा की बड़ी चूक

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में मंगलवार की शाम एक बड़ी सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। यहाँ से कुल 13 बाल कैदी फरार होने में कामयाब हो गए। इस घटना ने एक बार फिर सुधार गृह की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। फरार हुए नाबालिगों ने न केवल भागने की योजना बनाई, बल्कि परिसर की संपत्तियों को भी नुकसान पहुँचाया है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई है और सभी फरार बालकों की तलाश तेज कर दी गई है।

इस तरह दिया घटना को अंजाम

मिली जानकारी के अनुसार, इन 13 अपचारी बालकों ने सुनियोजित ढंग से अपनी भागने की रणनीति तैयार की थी। संप्रेक्षण गृह के पिछले हिस्से में लगे दरवाजे की लोहे की रॉड को इन बच्चों ने बड़ी आसानी से मोड़ दिया। रॉड मोड़ने के बाद उन्होंने वहाँ से निकलने का रास्ता बनाया और सीधे बाहर निकल गए। इसके बाद उन्होंने परिसर की ऊंची दीवार को फांदकर अंधेरे का फायदा उठाया और वहां से चंपत हो गए। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था, जो प्रबंधन की ढिलाई को दर्शाता है।

एक महीने में दूसरी बार हुई घटना

हैरानी की बात यह है कि अंबिकापुर के इस बाल संप्रेक्षण गृह से नाबालिगों के भागने की यह महज एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी घटना है। पिछली बार जब यहाँ से 11 बाल कैदी फरार हुए थे, तब प्रशासन की ओर से सुरक्षा को मजबूत करने के तमाम बड़े दावे किए गए थे। हालांकि, इस ताजा घटना ने उन सभी दावों को पूरी तरह खोखला और बेअसर साबित कर दिया है। लगातार हो रही इस तरह की वारदातों ने स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच चिंता बढ़ा दी है।

पुलिस की कार्रवाई और तलाश

देर शाम जैसे ही सुधार गृह के प्रबंधन को इस बात की जानकारी मिली कि 13 बाल कैदी गायब हैं, पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। बिना देरी किए इसकी सूचना गांधीनगर थाना पुलिस को दी गई। मामला दर्ज होते ही पुलिस टीम अलर्ट मोड पर आ गई है। पुलिस की अलग-अलग टीमें शहर के संभावित ठिकानों और आसपास के इलाकों में दबिश दे रही है ताकि फरार हुए सभी नाबालिगों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।

बिलासपुर में हुई नृशंस हत्या की यादें ताजा

इस घटना के साथ ही छत्तीसगढ़ में बाल सुधार गृहों की सुरक्षा का मुद्दा फिर से चर्चा में है। हाल ही में बिलासपुर के सरकंडा स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में दिल दहला देने वाली वारदात हुई थी। वहां चार बाल कैदियों ने सुरक्षा गार्ड नरेंद्र कुमार खांडे की बेरहमी से हत्या कर दी थी। आरोपियों ने गार्ड को जमीन पर पटककर उनके हाथ पीछे की तरफ रस्सी से बांध दिए थे और उनके मुंह में गमछा ठूंस दिया था ताकि वे शोर न मचा सकें। अंत में गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी गई थी। इस तरह की घटनाएं राज्य भर के बाल सुधार गृहों की लचर सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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