भारत
6 घंटे पहले
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अदालत परिसर में प्रदर्शन पर नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं के कोर्ट परिसर में पहुंचने के दौरान हुई नारेबाजी और हंगामे के मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए राहुल गांधी को नोटिस जारी किया है। यह मामला 12 अक्टूबर, सोमवार का है, जब विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े विषयों पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिका में गरिमा बनाए रखने की मांग
इस हंगामे को लेकर एक याचिका दायर की गई है, जिसमें अदालत परिसर में किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रदर्शन, भीड़ जुटाने और नारेबाजी करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि न्यायिक परिसरों में इस तरह की गतिविधियां होने से न्यायपालिका की गरिमा और उसके कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अदालत से इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
सीनियर वकील गौरव भाटिया की दलील
सुनवाई के दौरान सीनियर वकील गौरव भाटिया ने अदालत को बताया कि परिसर में हुई इन गतिविधियों से वकीलों का एक बड़ा वर्ग बेहद आहत है। उन्होंने जानकारी दी कि लगभग 200 वकीलों ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन यानी SCBA को पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया है। गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि यह हरकत न्यायपालिका को धमकाने की एक कोशिश की तरह है।
CJI ने दिया दो टूक जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए CJI ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या समूह अदालत को धमकाने की हिम्मत नहीं कर सकता। उन्होंने टिप्पणी की कि लोग बाहर सार्वजनिक मंचों पर कुछ भी बयानबाजी कर सकते हैं, लेकिन अदालत की दहलीज के भीतर कदम रखते ही उनकी भाषा और व्यवहार बदल जाते हैं। यह घटना कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है और अब सभी की नजरें इस नोटिस के जवाब पर टिकी हैं।
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