जून में खरपतवार और कीटों का हमला: गन्ने की पत्तियां काली, खेत की नमी खत्म, जानें बचाव उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 20
जून का महीना गन्ने की फसल के लिए नाजुक दौर होता है, जब बढ़ता तापमान और मानसून की दस्तक के बीच खरपतवार तथा कई तरह के कीट फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार इस समय फसल की खास देखभाल जरूरी है।

गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए जून का महीना बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस अवधि में जहां तापमान काफी ऊंचा रहता है, वहीं मानसून की शुरुआत भी हो जाती है। ऐसे में फसल को सामान्य से कहीं अधिक देखभाल की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि जरा-सी लापरवाही पैदावार पर सीधा असर डाल सकती है।

खरपतवार से पोषण और नमी पर खतरा

खेत में उगने वाले खरपतवार गन्ने के पौधों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरते हैं। ये अनचाहे पौधे फसल से जरूरी पोषक तत्व सोख लेते हैं, जिससे गन्ने की बढ़वार प्रभावित होती है। लखीमपुर खीरी के जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह के अनुसार, जून के दौरान खेतों में खरपतवार बहुत तेजी से फैलते हैं और ये गन्ने की फसल के पोषक तत्वों के साथ-साथ खेत की नमी को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

कीटों का बढ़ता प्रकोप

विशेषज्ञ बताते हैं कि जून में ही कई तरह के हानिकारक कीट सक्रिय हो जाते हैं। इस दौरान प्रारंभिक तना छेदक, पाइरिला, दीमक और टॉप बोरर जैसे कीटों का हमला फसल पर देखने को मिलता है। ये कीट पौधों को भीतर से कमजोर कर देते हैं और समय रहते रोकथाम न होने पर फसल को गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं।

पाइरिला और काली फफूंदी का असर

पाइरिला कीट का प्रकोप गन्ने की पत्तियों के लिए खासतौर पर घातक साबित होता है। इसके हमले से पत्तियों की सतह पर एक चिपचिपा पदार्थ जमा हो जाता है। इसी चिपचिपी परत पर आगे चलकर काली फफूंदी पनपने लगती है, जो पौधे की सेहत और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को प्रभावित करती है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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