सोनम श्री की सफलता की कहानी: विरोध और संघर्षों को पीछे छोड़ अब मंचों पर बिखेर रही हैं जादू व्यापार एक घंटा पहले 5
बिहार के जहानाबाद की लोक गायिका सोनम श्री ने परिवार और समाज के कड़े विरोध के बावजूद अपनी मेहनत के दम पर पहचान बनाई है। छठ महापर्व के अवसर पर उनका नया गीत 'केकर लाली लाली अंखिया' चर्चा में है।

छठ के गीतों में सोनम श्री की गूंज

छठ महापर्व का समय नजदीक आते ही चारों ओर लोक गीतों की मधुर धुन सुनाई देने लगी है। बिहार की माटी से जुड़े इन गीतों में एक विशेष प्रकार का आकर्षण होता है, जो कानों में पड़ते ही मन को भक्तिमय कर देता है। इसी कड़ी में जहानाबाद जिले की रहने वाली लोक गायिका सोनम श्री इस बार एक नया उपहार लेकर आई हैं। उनका नया छठ गीत केकर लाली लाली अंखिया केकर लंबी लंबी केस इन दिनों खूब चर्चा में है और इसे काफी पसंद किया जा रहा है। सोनम श्री केवल एक गायिका नहीं हैं, बल्कि उन्होंने एक लंबा और कठिन संघर्ष तय करके यह मुकाम हासिल किया है। आज वे न केवल निजी आयोजनों में बल्कि सरकारी मंचों पर भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं।

दोस्त का साथ और गायिकी की शुरुआत

सोनम श्री अपनी सफलता का श्रेय अपनी एक दोस्त को देती हैं जो पेशे से एक डांसर हैं। गायिका के अनुसार, उनके गायन के सफर की शुरुआत एक संयोग की तरह हुई थी। एक दिन अपनी सहेली के आग्रह पर वे उनके साथ स्टेज कार्यक्रम में शामिल होने गईं। रात भर कार्यक्रम चला और अंत में जब उन्हें अचानक माइक थमाया गया, तो वे घबरा गईं। उनके हाथ कांप रहे थे, लेकिन उस रात गाए गए एक गीत ने उन्हें दर्शकों से इतना प्यार दिलवाया कि उन्होंने गायिकी को ही अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया। इस अनुभव ने उनके अंदर के डर को खत्म कर दिया और वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने लगीं।

विरोध और सामाजिक चुनौतियों का सामना

हालांकि, सोनम का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। जब उनके परिवार को उनके इस निर्णय के बारे में पता चला, तो भारी विरोध का सामना करना पड़ा। शुरुआती दौर में उनके परिजन इस काम के खिलाफ थे। वहीं दूसरी ओर, समाज के लोगों ने भी तरह-तरह की बातें बनानी शुरू कर दीं। उन्हें अपमानित करने के लिए 'नचनिया' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें घर से बाहर निकलकर अकेले रहने तक का फैसला लेना पड़ा। सोनम बताती हैं कि यह समय उनके जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर था, जहाँ एक तरफ समाज का तिरस्कार था और दूसरी तरफ सपनों को पूरा करने की जिद।

चार साल की मेहनत और बदलती किस्मत

सुरुआती दौर में आर्थिक तंगी ने भी उन्हें परेशान किया। कई कार्यक्रमों में तो उन्हें पारिश्रमिक के तौर पर कुछ भी हासिल नहीं होता था। जीवन यापन करने के लिए उन्होंने ब्यूटिशियन का काम सीखा और एक जगह नौकरी की। अपनी मेहनत की कमाई से उन्होंने अपने घर का खर्च चलाया और गायिकी के अपने शौक को भी जीवित रखा। सोनम के गायन का सफर औपचारिक रूप से 2018 में शुरू हुआ था। उन्होंने पिछले 4 वर्षों तक निरंतर कड़ा परिश्रम किया। आज स्थिति यह है कि उनके पास इतना काम है कि उन्हें आराम करने का भी समय नहीं मिलता। वे श्रावणी महोत्सव जैसे बड़े आयोजनों में भी भाग ले चुकी हैं, जहाँ उन्होंने पूरे एक महीने तक देवघर में अपनी प्रस्तुति दी।

शिक्षा और भविष्य की राह

सोनम श्री केवल लोकगीत ही नहीं गातीं, बल्कि वे संगीत की बारीकियों को समझने के लिए विधिवत पढ़ाई भी कर रही हैं। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार के लिए रियाज और सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। उनके पास अब निजी और सरकारी दोनों तरह के बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आमंत्रण आते हैं। उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो समाज की बेड़ियों और आर्थिक तंगी को पीछे छोड़कर सफलता की सीढ़ियां चढ़ी जा सकती हैं। वे आज जहानाबाद ही नहीं, बल्कि बिहार के अन्य हिस्सों में भी एक उभरती हुई पहचान बन चुकी हैं और अपनी कला के माध्यम से लोक संगीत को आगे बढ़ा रही हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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