रिटायरमेंट के बाद बदली किस्मत, रांची के इंद्रभूषण ने लेमनग्रास के कारोबार से खड़ा किया 50 लाख का साम्राज्य व्यापार एक महीने पहले 38
रांची के रहने वाले इंद्रभूषण ने सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद हार मानने के बजाय लेमनग्रास की खेती और उससे बने उत्पादों का व्यवसाय शुरू किया, जो आज 50 लाख रुपये का टर्नओवर पार कर गया है।

नई शुरुआत की मिसाल

अक्सर लोग रिटायरमेंट के बाद घर पर आराम करना पसंद करते हैं, लेकिन रांची के निवासी इंद्रभूषण ने एक अलग ही रास्ता चुना है। सरकारी सेवा से निवृत्त होने के बाद उन्होंने घर पर बैठने के बजाय एक नई उद्यमी यात्रा शुरू की। आज वे लेमनग्रास की खेती और उससे तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों के जरिए न केवल खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि समाज के अन्य लोगों के लिए भी कमाई का जरिया बन गए हैं। उनकी मेहनत से खड़ी हुई कंपनी का नाम अनंतहा है और इसका सालाना टर्नओवर अब 50 लाख रुपये से अधिक हो चुका है।

अनंतहा कंपनी और उत्पादों की रेंज

इंद्रभूषण ने अपनी कंपनी अनंतहा के जरिए लेमनग्रास के गुणों को बाजार तक पहुंचाया है। वे बताते हैं कि लेमनग्रास के कई स्वास्थ्यवर्धक और उपयोगिता संबंधी फायदे हैं। उनकी कंपनी इस घास से चेहरे पर लगाने वाला तेल, सुगंधित परफ्यूम और घर की साफ-सफाई में काम आने वाला फिनाइल जैसे उत्पाद तैयार करती है। इन उत्पादों की मांग अब केवल रांची तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूर-दराज के अंडमान निकोबार तक भी पहुंच गई है। डिजिटल दौर का लाभ उठाते हुए उन्होंने अपनी आधिकारिक वेबसाइट, इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज के माध्यम से उत्पादों को बाजार में उतारा है, जहां से उन्हें रोजाना 100 से ज्यादा ऑर्डर प्राप्त होते हैं।

लेमनग्रास के बेमिसाल फायदे

इंद्रभूषण लेमनग्रास की उपयोगिता पर जोर देते हुए कहते हैं कि यह एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है। उनके अनुसार, यदि ऑफिस के केबिन में इसकी कुछ बूंदें छिड़क दी जाएं, तो ताजगी का अहसास होता है। पानी में इसकी कुछ मात्रा मिलाने से घर की सफाई प्रभावी तरीके से हो जाती है। इसके अलावा, त्वचा पर इसका इस्तेमाल करने से पिंपल्स और दाग-धब्बों को कम करने में भी मदद मिलती है। इन्हीं गुणों के कारण उनके उत्पादों की लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

रोजगार का जरिया बनी यह पहल

इस व्यवसाय ने कई परिवारों के लिए आजीविका का मार्ग प्रशस्त किया है। इंद्रभूषण बताते हैं कि उनके स्टाफ में 100 से अधिक लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं, जबकि खेती-बाड़ी से जुड़े किसान अलग हैं। एक नौकरीपेशा व्यक्ति से उद्यमी बने इंद्रभूषण का मानना है कि रिटायरमेंट जीवन का अंत नहीं, बल्कि दूसरी पारी की शुरुआत है। उन्हें गर्व है कि अब वे नौकरी करने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि दूसरों को रोजगार देने वाले बन गए हैं।

रिटायरमेंट के बाद का नजरिया

इंद्रभूषण समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरित करते हुए कहते हैं कि रिटायरमेंट का मतलब खाली बैठकर समय बिताना नहीं होता है। उनका मानना है कि यदि शरीर स्वस्थ है और दिमाग सक्रिय है, तो व्यक्ति को अपने उन सपनों को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए जिन्हें नौकरी के दौरान समय की कमी के कारण छोड़ दिया गया था। वे इसे दूसरी पारी शुरू करने का सबसे बेहतरीन अवसर मानते हैं। उनकी सफलता की यह कहानी साबित करती है कि दृढ इच्छाशक्ति के साथ किसी भी उम्र में नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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