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3 दिन पहले
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झारखंड की राजधानी रांची के राहुल और कनिका पति-पत्नी हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और सूझबूझ से 'मल्हारी रेस्टोरेंट' को एक सफल पहचान दिलाई है। राहुल बताते हैं कि आज उनके रेस्टोरेंट की दो ब्रांच और एक बैंकट हॉल हैं। हालांकि यहां तक का सफर आसान नहीं था और इस पूरी यात्रा में उनकी पत्नी ने हर कदम पर साथ निभाया। दोनों ने लव मैरिज की और एजुकेशन लोन लेकर पढ़ाई पूरी की। कर्ज चुकाने के लिए राहुल ने पहले नेवी में कैप्टन के तौर पर नौकरी की और इसके बाद होटल व्यवसाय की ओर रुख किया। आज स्थिति यह है कि दंपती एक और होटल खोलने की तैयारी में जुटा है।
तीन साल की उम्र में सिर से उठा पिता का साया
राहुल बताते हैं कि जब वह महज तीन साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने अकेले ही उनकी परवरिश की। उन्हें अपने पिता की शक्ल तक याद नहीं कि वह दिखने में कैसे थे। बावजूद इसके वह हमेशा जिंदगी को सकारात्मक नजरिए से देखते हैं। उनका मानना है कि किसी न किसी के पास उनसे भी बड़ी समस्याएं हैं, और जब यह सोचते हैं तो अपना दुख छोटा लगने लगता है।
लोन चुकाने के लिए चुनी नेवी की राह
पढ़ाई के लिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया था, जिसे चुकाना उनके लिए जरूरी था। इसी वजह से उन्होंने प्राइवेट नेवी में नौकरी की, जहां कैप्टन के पद पर रहते हुए उन्होंने अपना पूरा कर्ज अदा कर दिया। राहुल कहते हैं कि बचपन से ही उन्हें होटल व्यवसाय का गहरा शौक रहा है, लेकिन पहले लोन चुकाना उनकी प्राथमिकता थी।
क्वालिटी के दम पर हिट हुआ पहला रेस्टोरेंट
नौकरी से लौटने के बाद राहुल ने अपना पहला रेस्टोरेंट खोला, जो खूब चला। इसकी सफलता की वजह यह रही कि उन्होंने गुणवत्ता के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया। ग्राहकों को हर दिन कुछ नया और अलग कैसे परोसा जाए, इस पर उनका खास जोर रहा। इस काम में उनकी पत्नी ने भी पूरा सहयोग दिया।
लंदन से करियर छोड़कर साथ आईं पत्नी
राहुल की पत्नी पहले लंदन में चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर काम करती थीं, लेकिन अब वह भारत लौट चुकी हैं। दोनों ने शादी से पहले दो साल तक एक-दूसरे को अच्छी तरह समझा और फिर परिवार वालों को अपने रिश्ते के बारे में बताया। परिवार ने भी खुले दिल से उनके रिश्ते को स्वीकार किया। आज इस दंपती की एक छोटी बेटी भी है।
हर फैसले में पत्नी की बराबर की भागीदारी
राहुल बताते हैं कि होटल के मेन्यू से लेकर पार्टी की योजना तक में उनकी पत्नी के कई आइडिया शामिल रहते हैं, और दोनों आपसी तालमेल बनाकर काम को आगे बढ़ाते हैं। उनके मुताबिक, वह बहुत जल्द एक और होटल शुरू करने वाले हैं और कुछ ही दिनों में इसकी ओपनिंग डेट सामने आ जाएगी।
ईमानदारी और गुणवत्ता ही सफलता का मूलमंत्र
राहुल आगे चलकर अपने होटल व्यवसाय को और विस्तार देना चाहते हैं। उनका कहना है कि इस कारोबार का एकमात्र मूलमंत्र खाने में ईमानदारी बरतना है। वह मानते हैं कि ईमानदारी और गुणवत्ता जितनी बेहतर होगी, सफलता उतनी ही ऊंचाई तक पहुंचेगी। उन्होंने इन उसूलों से कभी समझौता नहीं किया और न ही आगे करेंगे।
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