UPSC में छठी रैंक और जम्मू-कश्मीर से दिल्ली तक का सफर: जानें आईएएस नवीन कुमार चौधरी की प्रेरणादायक कहानी व्यापार 2 घंटे पहले 3
दरभंगा के एक छोटे से गांव से निकलकर यूपीएससी परीक्षा में छठी रैंक हासिल करने वाले नवीन कुमार चौधरी आज दिल्ली सरकार में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

सफलता का लंबा सफर

बिहार के दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड के तहत आने वाले मझौलिया गांव के रहने वाले नवीन कुमार चौधरी आज प्रशासनिक गलियारों का एक जाना-माना नाम बन चुके हैं। उन्होंने 1994 में संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर छठी रैंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र का मान बढ़ाया था। उस समय उनकी इस शानदार सफलता पर पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई थी और ग्रामीणों ने जमकर जश्न मनाया था।

जम्मू-कश्मीर में सेवा और विवाद

परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद नवीन कुमार चौधरी ने जम्मू-कश्मीर कैडर को चुना। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने लेह-लद्दाख के उपायुक्त यानी डीसी समेत कई चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं। हालांकि, उनके करियर में एक समय ऐसा भी आया जब वे विवादों में घिरे। एक पावर प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन उपराज्यपाल सत्यपाल मलिक की ओर से उन पर आरोप लगाए गए थे। इस मामले में सीबीआई ने उनके आवास समेत कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। लेकिन, लंबी जांच के बाद भी उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला और जांच में सब कुछ स्पष्ट रहा। इसे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक साजिश से प्रेरित कदम माना गया और अंततः उनकी छवि साफ रही।

दिल्ली में नई जिम्मेदारी और काम

जांच प्रक्रिया पूरी होने और क्लीन चिट मिलने के बाद, प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उनका कैडर बदलकर मेघालय कर दिया गया था। लेकिन बाद में दिल्ली सरकार ने उन्हें प्रतिनियुक्ति पर अपने यहां बुला लिया। दिल्ली सरकार में काम करते हुए उन्हें सबसे पहले यमुना नदी की सफाई की जटिल जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस काम में उन्होंने अपनी प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया और काफी हद तक सफलता भी हासिल की। वर्तमान में नवीन कुमार चौधरी दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग में प्रधान सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

गांव को बेटे पर गर्व

अपने गांव मझौलिया के लोगों के लिए नवीन कुमार आज भी एक प्रेरणा हैं। ग्रामीणों का मानना है कि उनके आईएएस बनने से गांव का नाम देशभर में रोशन हुआ है। हालांकि, बदलते वक्त के साथ गांव वालों की उम्मीदें बदल गई हैं और वे अब किसी एक अधिकारी से गांव के कायाकल्प की पूरी उम्मीद नहीं रखते, फिर भी पूरे गांव को अपने इस सपूत की उपलब्धियों पर गर्व है। उनकी कहानी बताती है कि कठिन परिश्रम और ईमानदारी के दम पर कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर व्यक्ति शीर्ष तक पहुंच सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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