दिल्ली में तैनात नायक सिकंदर सिंह का निधन, लुधियाना में सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार पंजाब एक महीने पहले 61
दिल्ली में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से प्राण गंवाने वाले नायक सिकंदर सिंह का पंजाब के लुधियाना में अंतिम संस्कार किया गया, जिसे देख हर किसी की आंखें नम हो गईं।

वीर सैनिक को अंतिम विदाई

पंजाब के लुधियाना जिले के अंतर्गत आने वाले जगराओं के निकट स्थित गगड़ा गांव में शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। भारतीय सेना की 5 सिख लाइट इन्फैंट्री में तैनात 33 वर्षीय नायक सिकंदर सिंह का पार्थिव शरीर शुक्रवार की सुबह उनके पैतृक गांव पहुंचा। दिल्ली में कर्तव्य पालन के दौरान हृदय गति रुकने से उनका असामयिक निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान उनके भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी। शहीद जवान के घर पहुंचते ही उनकी पत्नी, दो छोटी बेटियों और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव के तमाम लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। नायक सिकंदर सिंह तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और एक साधारण मजदूर परिवार से होने के बावजूद वे लगभग 16 साल पहले कड़ी मेहनत कर सेना में भर्ती हुए थे। वे अपने पीछे पत्नी रमनजीत कौर और दो छोटी बच्चियां छोड़ गए हैं, जिनकी उम्र क्रमशः ढाई साल और आठ महीने है।

पत्नी ने याद किए अंतिम पल

शहीद की पत्नी रमनजीत कौर ने बताया कि उनके पति से आखिरी बातचीत करीब चार दिन पहले फोन पर हुई थी। उस समय सिकंदर सिंह ने उन्हें बताया था कि उनके सीने में काफी दर्द हो रहा है और वे ठीक से बात करने की स्थिति में भी नहीं थे। उस आखिरी बातचीत में वे अपनी बेटियों से भी बात नहीं कर सके। रमनजीत कौर ने याद करते हुए बताया कि विवाह के बाद सिकंदर सिंह ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया और एमए तथा बीएड की शिक्षा पूरी करवाई। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वे उनकी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करें।

एक अनुशासित सैनिक का सफर

लगभग 16 साल पहले भारतीय सेना में शामिल हुए नायक सिकंदर सिंह अपनी मेहनत और अनुशासन के लिए जाने जाते थे। शुक्रवार की सुबह जब उनका पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा, तो वहां भारी भीड़ जमा थी। सुबह करीब 10 बजे पूरे विधि-विधान और सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। कैप्टन पूर्ण सिंह और हवलदार अमरपाल सिंह समेत कई सैन्य अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

यूनिट की ओर से हर संभव सहायता का वादा

5 सिख रेजिमेंट के सूबेदार गुरमीत सिंह ने स्पष्ट किया कि नायक सिकंदर सिंह उनकी यूनिट का हिस्सा थे, हालांकि उस समय वे किसी अन्य स्थान पर तैनात थे। उन्होंने बताया कि सिकंदर सिंह की बीमारी के बारे में यूनिट को कोई पूर्व सूचना नहीं थी और ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने अपनी तबीयत के बारे में किसी को जानकारी नहीं दी थी। हालांकि प्रारंभिक तौर पर उनकी मृत्यु का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है, लेकिन वास्तविक स्पष्टीकरण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद ही संभव होगा। सूबेदार गुरमीत सिंह ने यह भरोसा दिलाया है कि यूनिट की ओर से शहीद के परिवार को हर मुमकिन मदद उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अन्य शहीद परिवारों का ख्याल रखा जाता है, उसी तरह नायक सिकंदर सिंह के परिवार की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाएगी और उन्हें हर तरह की सहायता प्रदान की जाएगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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