सीतापुर में घर वापसी: 8 साल बाद अब्दुल्ला ने बेटे के साथ अपनाया हिंदू धर्म, अब बने दारोगा सिंह उत्तर प्रदेश 2 महीने पहले 85
उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक पिता और पुत्र ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म में वापसी की है। पिता ने आरोप लगाया कि उन्हें फंसाने का झांसा देकर धर्म परिवर्तन कराया गया था।

सीतापुर में फिर से सनातन धर्म में लौटे पिता-पुत्र

उत्तर प्रदेश के सीतापुर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां एक पिता और उनके बेटे ने हिंदू धर्म में अपनी वापसी की है। पिछले 8 साल से इस्लाम का पालन कर रहे अब्दुल्ला अब फिर से हिंदू बन गए हैं और उन्होंने अपना नया नाम दारोगा सिंह रखा है। वहीं, उनके बेटे खालिद ने अपना नाम बदलकर नीतीश सिंह रख लिया है।

झूठे मामले में फंसाने का लगाया आरोप

दारोगा सिंह ने अपने धर्म परिवर्तन के पीछे की कहानी बताते हुए कहा कि उन्हें एक साजिश के तहत इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया गया था। उनका आरोप है कि करीब 8 साल पहले गांव के कुछ लोगों ने उन्हें एक फर्जी मुकदमे में फंसा दिया था। इसके बाद, कानूनी मदद और अन्य प्रलोभन देकर उन्हें धर्म बदलने के लिए राजी किया गया। हालांकि, धर्म परिवर्तन के बाद उन्हें किसी भी तरह की कोई मदद नहीं मिली और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे थे।

विधि-विधान से हुई घर वापसी

पिता-पुत्र की यह घर वापसी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के सहयोग से संपन्न हुई। सीतापुर के एक स्थानीय देवी मंदिर में पूरे विधि-विधान से हवन-पूजन का आयोजन किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान दोनों को जनेऊ धारण कराया गया और उन्होंने सनातन धर्म में पुनः प्रवेश किया। इस दौरान मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने जय श्री राम के नारे भी लगाए। दारोगा सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे किसी के बहकावे में आकर अपना धर्म न बदलें।

प्रशासन की क्या है राय

स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस मामले पर स्पष्ट किया है कि पिता और पुत्र ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म को अपनाया है और उन पर किसी भी प्रकार का कोई दबाव नहीं था। हालांकि, किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने के लिए इलाके में पूरी सतर्कता बरती जा रही है। गौरतलब है कि कानून के मुताबिक, स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन किसी को प्रलोभन या जबरन धर्म बदलने के लिए मजबूर करना कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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