बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
स्थानीय सामग्री से तैयार हो रहे खिलौने
बिहार का सीतामढ़ी जिला इन दिनों आंगनबाड़ी केंद्रों में अपनाए जा रहे एक अनूठे प्रयोग के लिए चर्चा में है। यहाँ के केंद्रों में फोक टीएलएम (Folk Teaching Learning Material) मॉडल के माध्यम से बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा को पूरी तरह से नया और आकर्षक स्वरूप दिया गया है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को प्रभावी और सरल बनाना है।
आकांक्षी जिला कार्यक्रम का बड़ा असर
इस नवाचार को आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत जमीन पर उतारा गया है। इसके अंतर्गत आंगनबाड़ी सेविकाओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें यह सिखाया गया है कि किस प्रकार बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक खर्च के बच्चों के लिए बेहतरीन शिक्षण सामग्री तैयार की जा सकती है। इसके लिए सेविकाएं आसपास मिलने वाली मिट्टी, पत्थर, प्लास्टिक और अन्य प्रकार की स्थानीय अनुपयोगी वस्तुओं का कुशलता से इस्तेमाल कर रही हैं।
पढ़ाई और खेल का अनूठा संगम
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पढ़ाई का बोझ नहीं है। बच्चे खिलौनों और खेल-खेल के जरिए बुनियादी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस बदलाव के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही, बच्चों की रुचि पढ़ने में बढ़ी है और उनकी सीखने की क्षमता में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस मॉडल की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के मुख्यमंत्री ने भी इस नवाचार की खुलकर प्रशंसा की है।
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