बिहार
एक महीने पहले
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विचारों
बिहार के सीतामढ़ी जिले से एक बेहद ही हैरान करने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां के नानपुर प्रखंड में कुछ दबंगों की मनमानी के कारण स्कूली बच्चों का भविष्य और उनकी सुरक्षा दांव पर लग गई है। बहूरार पश्चिम टोल में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के बच्चों और शिक्षकों के लिए इन दिनों स्कूल पहुंचना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय दबंगों और कुछ ग्रामीणों ने मिलकर स्कूल तक जाने वाले इकलौते मुख्य रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसके कारण न केवल बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है, बल्कि रोज सुबह स्कूल जाने के लिए उन्हें एक बेहद खतरनाक सफर तय करना पड़ रहा है।
कटीली झाड़ियों और जंगली रास्तों से गुजरने की मजबूरी
इस संकटपूर्ण स्थिति को लेकर विद्यालय की प्रधान शिक्षिका रूपा कुमारी ने जमीनी हकीकत बयां की है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब एक महीने से स्कूल का मुख्य मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध पड़ा हुआ है। अब स्थिति यह हो गई है कि मासूम बच्चों और शिक्षकों को पीछे के रास्ते से होकर आना पड़ता है। यह वैकल्पिक रास्ता एक घने और खतरनाक जंगल से होकर गुजरता है, जहां कटीली झाड़ियां और बेहद ऊबड़-खाबड़ जमीन है। इस रास्ते से होकर रोज स्कूल पहुंचना शिक्षकों और बच्चों के लिए भारी मुसीबत का सबब बन चुका है।
स्थानीय अभिभावकों ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे बहुत छोटे हैं और उनके लिए हर रोज ऐसे सुनसान और घने जंगली रास्ते से गुजरना किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं है। इस इलाके में झाड़ियां इतनी घनी हैं कि वहां हमेशा सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के काटने का डर बना रहता है। ऐसे में किसी अनहोनी की आशंका से माता-पिता और शिक्षक हर वक्त डरे-सहमे रहते हैं।
वर्ष 2007 से संचालित हो रहा है स्कूल, आपसी सहमति से मिली थी जमीन
इस पूरे विवाद के पीछे की कहानी भी काफी हैरान करने वाली है। इस राजकीय प्राथमिक विद्यालय का इतिहास इस प्रकार है:
- यह स्कूल इस क्षेत्र में वर्ष 2007 से लगातार संचालित हो रहा है।
- वर्ष 2014 में इस विद्यालय के पक्के भवन का निर्माण कार्य पूरा किया गया था।
- स्कूल के निर्माण के समय गांव के ही कुछ सहृदय और बड़े दिल वाले लोगों ने मिलकर अपनी थोड़ी-थोड़ी जमीन दान में दी थी, ताकि बच्चों का भविष्य संवर सके।
- जमीन दान देते वक्त गांव के लोगों के बीच एक औपचारिक बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें सभी की लिखित सहमति से विद्यालय के आवागमन के लिए मुख्य रास्ता देने का फैसला लिया गया था।
लेकिन आज इतने सालों बाद, जिन लोगों ने स्कूल के रास्ते के लिए अपनी जमीन दी थी, उन्हीं के परिजनों और वारिसों ने आपसी जिद और विवाद के चलते उस मुख्य मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसे सीधे तौर पर मासूम बच्चों के बेहतर भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।
प्रशासन से गुहार: जल्द समाधान की आस
इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को लेकर विद्यालय प्रशासन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। प्रधान शिक्षिका रूपा कुमारी ने बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में नानपुर के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को एक लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।
इसके साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुपरी के SDO और सीतामढ़ी के जिलाधिकारी (DM) को भी एक विशेष अनुरोध पत्र भेजा गया है। इस पत्र में स्थानीय प्रशासन से जल्द से जल्द उचित कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने की अपील की गई है ताकि स्कूल का रास्ता दोबारा खुलवाया जा सके। इस शिकायती पत्र की एक-एक प्रतिलिपि नानपुर के अंचलाधिकारी और ग्राम पंचायत बहूरार के मुखिया को भी भेजी गई है, ताकि स्थानीय स्तर पर भी इसके समाधान के प्रयास किए जा सकें। अब देखना यह होगा कि सीतामढ़ी जिला प्रशासन इन मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनका रास्ता बहाल कराने के लिए कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है।
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