राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एसआईटी की रडार पर 10 नए नाम, अनिल मिश्रा और चंपत राय से भी हो सकती है पूछताछ उत्तर प्रदेश 2 महीने पहले 62
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में एसआईटी का शिकंजा कसता जा रहा है। मामले के दूसरे चरण की जांच में 10 नए लोग संदेह के घेरे में हैं और ट्रस्टी अनिल मिश्रा से भी सवाल-जवाब किए गए हैं।

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच तेज

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में हुई चोरी और हेरफेर के मामले ने तूल पकड़ लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी गुरुवार को एक बार फिर अयोध्या पहुंची और मामले की सघन जांच शुरू की। इस दौरान एसआईटी ने मंदिर के ट्रस्टी अनिल मिश्रा को पूछताछ के लिए बुलाया। जांच एजेंसियों का मानना है कि मंदिर में कर्मचारियों की भर्ती में रिश्वतखोरी का बड़ा खेल चल रहा था, जिसके तार कई रसूखदार लोगों से जुड़े हो सकते हैं। प्रारंभिक जांच में इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि कुंभ मेले के दौरान मंदिर में चढ़ावे के रूप में आए नोटों के बंडल बोरियों में भरकर गायब किए गए थे। इस पूरे घोटाले की परतें खोलने के लिए एसआईटी न केवल ट्रस्टी, बल्कि मंदिर के सेवादारों से भी पूछताछ कर रही है।

अनिल मिश्रा और गोपाल राव की बढ़ी मुश्किलें

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर घेरा सख्त होता जा रहा है। वर्तमान में ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए कई आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उन्हें अनिल मिश्रा की सिफारिश पर मंदिर में काम पर रखा गया था। इन आरोपियों के बयानों ने जांच के केंद्र में अनिल मिश्रा और गोपाल राव को लाकर खड़ा कर दिया है। पुलिस अब उन सभी आरोपियों की संपत्तियों का विस्तृत ब्यौरा जुटाने में लगी है, जो कुछ समय पहले तक बहुत साधारण जीवन जीते थे। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि जो लोग कभी ऑटो चलाते थे, ठेला लगाकर पानी बेचते थे या डिलीवरी ब्वॉय के तौर पर काम करते थे, वे अचानक करोड़पति कैसे बन गए। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ये सभी आरोपी किसी संगठित गिरोह की तरह मिलकर चोरी कर रहे थे और लूटे गए पैसों का बंटवारा कैसे और किन लोगों के बीच किया जाता था।

रिमांड पर अविनाश शुक्ला, चमकी किस्मत की हकीकत

मामले के एक प्रमुख आरोपी अविनाश शुक्ला को अदालत ने 24 घंटे की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। प्रतापगढ़ जिले के नरियावां बाबूपुर गांव के रहने वाले अविनाश के पिता एक किसान हैं और उनके पास कुल 14 बीघे खेती की जमीन है। साल 2025 में अविनाश अयोध्या आया और उसे राम मंदिर में चढ़ावा गिनने का काम सौंपा गया। मंदिर में काम मिलते ही उसकी जीवनशैली में नाटकीय बदलाव आ गया। गांव में उसका परिवार जो पहले कच्चे घरों में रहता था, उसने हाल ही में एक नया और आलीशान घर बनवाया है। पुलिस ने जब इस घर की तलाशी ली और निर्माण कार्यों का जायजा लिया, तो पता चला कि गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले तक वहां फिनिशिंग का काम चल रहा था, जो अब ठप पड़ा है। पुलिस अब उसकी सभी संपत्तियों के स्रोतों की जांच कर रही है।

लवकुश मिश्रा पर बुलडोजर की तलवार

चढ़ावा चोरी के आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासन अब बुलडोजर एक्शन की भी तैयारी में है। आरोपी लवकुश मिश्रा ने अयोध्या के शहादतगंज इलाके में अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम से एक प्लॉट खरीदा था, जिस पर तीन मंजिला आलीशान इमारत बनाई जा रही थी। इस जमीन और निर्माण की कुल लागत एक करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है। हालांकि, लवकुश की गिरफ्तारी के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है। अब अयोध्या विकास प्राधिकरण ने सुप्रिया मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का स्पष्ट कहना है कि निर्माण के दौरान कई नियमों का उल्लंघन किया गया है। यदि सात दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो मकान को ढहाने की कार्रवाई की जाएगी।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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