राजस्थान
47 मिनट पहले
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सीकर के छापर गांव की बेटियों ने बदली तस्वीर
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित नीमकाथाना पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले छापर गांव ने एक ऐसी मिसाल कायम की है जो पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस छोटे से गांव की तीन प्रतिभावान बेटियों ने पंचायती राज चुनाव में भाग लेकर न केवल जीत हासिल की, बल्कि पहली ही बार में सरपंच पद तक का सफर तय कर एक प्रेरक रिकॉर्ड बनाया है। पूजा वर्मा, मनीषा देवी और सुनीता वर्मा नाम की इन तीनों महिलाओं ने अपनी मेहनत और जनता के भरोसे के दम पर चुनावी मैदान में बाजी मारी है।
पहली चुनावी कोशिश में ऐतिहासिक जीत
यह जीत इसलिए भी विशेष है क्योंकि तीनों ही महिला प्रतिनिधियों का यह पहला चुनावी अनुभव था। अपने गांव के परिवेश से निकलकर इन महिलाओं ने सीधे तीन अलग-अलग ग्राम पंचायतों में सरपंच का पद संभाला है। सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ये तीनों निर्वाचित सरपंच अनुसूचित जाति यानी SC वर्ग से आती हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो पहली बार में भी बड़ी सफलता पाई जा सकती है।
तीनों सरपंचों का परिचय और जीत का अंतर
तीनों महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में जनता का भारी समर्थन हासिल किया है। उनके चुनावी प्रदर्शन का विवरण इस प्रकार है:
- पूजा वर्मा (28 वर्ष): बीए-बीएड की शिक्षा प्राप्त पूजा वर्मा ने भगेगा ग्राम पंचायत से अपनी किस्मत आजमाई थी। उन्होंने सामान्य महिला सीट पर चुनाव लड़ते हुए 182 वोटों के बड़े अंतर से शानदार जीत दर्ज की है।
- मनीषा देवी (34 वर्ष): 10वीं तक शिक्षित मनीषा देवी ने रामपुरा थोई ग्राम पंचायत के चुनावी रण में कदम रखा था। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर उन्होंने पहली बार में ही चुनाव जीत लिया।
- सुनीता वर्मा (37 वर्ष): एक साधारण किसान परिवार से आने वाली सुनीता वर्मा ने बुर्जा की ढाणी ग्राम पंचायत से चुनाव लड़ा था। एससी महिला आरक्षित सीट पर उन्होंने 398 वोटों के बड़े अंतर से अपनी जीत का परचम लहराया है।
विकास के लिए तय की प्राथमिकताएं
जीत हासिल करने के बाद अब इन तीनों सरपंचों ने अपने-अपने क्षेत्रों के विकास की रूपरेखा तैयार कर ली है। उनका मुख्य उद्देश्य अपने गांवों में आधुनिक तकनीक और शिक्षा का विस्तार करना है:
- पूजा वर्मा ने संकल्प लिया है कि वे अपने क्षेत्र में युवाओं के लिए ओपन जिम और आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था करेंगी।
- मनीषा देवी का पूरा ध्यान ग्रामीण महिलाओं की शिक्षा और उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है।
- सुनीता वर्मा अपनी ग्राम पंचायत में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए डिजिटल लाइब्रेरी बनवाने को अपनी सबसे पहली प्राथमिकता मानती हैं।
इन तीनों महिलाओं का सरपंच बनना न केवल उनके अपने परिवारों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि यह उन तमाम ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है जो समाज में बदलाव लाने का सपना देखती हैं। छापर गांव की इन बेटियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही दिशा में किए गए प्रयास का परिणाम हमेशा सुखद होता है। अब पूरी पंचायतें इन नव-निर्वाचित सरपंचों से विकास की नई उम्मीदें लगाए हुए हैं।
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