महुआ का बदलता स्वरूप: अब शराब नहीं बल्कि पौष्टिक लड्डुओं के लिए मशहूर हुआ सीधी का महुआ मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 6
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में ग्रामीण महिलाएं महुआ के फूलों से स्वादिष्ट और पौष्टिक लड्डू बना रही हैं, जिनकी बढ़ती लोकप्रियता अब भोपाल से लेकर इंग्लैंड तक पहुंच चुकी है।

परंपरा से हटकर नई पहचान

मध्य प्रदेश का आदिवासी बहुल सीधी जिला इन दिनों एक अनोखी बदलाव की कहानी लिख रहा है। जिस महुआ के फूल को अब तक केवल पारंपरिक रूप से शराब बनाने के लिए जाना जाता था, वही अब ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आजादी का आधार बन गया है। इन महिलाओं ने महुआ का उपयोग करके पौष्टिक लड्डू और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने की एक अनूठी पहल शुरू की है। यह उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों में धूम मचा रहे हैं, बल्कि इनकी मांग भोपाल से लेकर विदेशों में इंग्लैंड तक पहुंच गई है।

रोजगार का नया माध्यम

सीधी शहर में स्थित हर्बल कैफे केंद्र और वन धन उत्पाद केंद्र के माध्यम से स्व-सहायता समूहों की महिलाएं महुआ को एक व्यावसायिक उत्पाद के रूप में विकसित कर रही हैं। यह पहल महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने के नए रास्ते खोल रही है। ग्राम तिलवानी की निवासी और राज लक्ष्मी बंधन स्व-सहायता समूह की सदस्य चंद्रावती सिंह गौड़ बताती हैं कि सीधी में महुआ के पेड़ों की बहुतायत है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में इन फूलों का एकमात्र उपयोग शराब बनाने तक सीमित था, जिससे कई प्रकार की सामाजिक चुनौतियां भी खड़ी हो जाती थीं। हालांकि, एक संस्था के मार्गदर्शन में जब महिलाओं को यह पता चला कि महुआ से लड्डू और अचार जैसे स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ भी बनाए जा सकते हैं, तो उन्होंने इसे बड़े स्तर पर अपनाने का फैसला किया।

कैसे होती है इन लड्डुओं की तैयारी

हर्बल कैफे में कार्यरत अनुप्रिया कुशवाहा का कहना है कि महुआ का फूल प्राकृतिक रूप से मीठा होने के साथ-साथ उच्च पोषक तत्वों से भरा होता है। इन लड्डुओं को तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक और स्वास्थ्य के अनुकूल है। सबसे पहले सूखे महुआ के फूलों को पूरी तरह साफ किया जाता है और फिर उन्हें शुद्ध घी में अच्छी तरह भूना जाता है। इसके बाद इसमें गुड़ का उपयोग मिठास के लिए किया जाता है। स्वाद और पौष्टिकता को और बढ़ाने के लिए इसमें तिल, मूंगफली, सूखा नारियल और विभिन्न प्रकार के सूखे मेवे मिलाए जाते हैं, जो इसे एक बेहतरीन स्नैक बनाते हैं।

बाजार में बढ़ती मांग

शुरुआती दिनों में इन महिलाओं ने छोटे स्तर पर प्रयोग के तौर पर इन उत्पादों को बनाना शुरू किया था। लोगों ने जब इनके स्वाद और पोषण को पसंद किया, तो बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ती चली गई। आज यह छोटे स्तर का प्रयास एक बड़े रोजगार में बदल चुका है। वन विभाग के सहयोग से संचालित ये केंद्र अब उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग में भी महिलाओं की मदद कर रहे हैं। यही कारण है कि आज सीधी में तैयार ये खास लड्डू राज्य की राजधानी भोपाल के बाजारों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड तक भेजे जा रहे हैं। महुआ के इस नए स्वरूप ने न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दी है, बल्कि आदिवासी महिलाओं के आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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