शिवपुरी: सरकारी योजना से बदली हलवाई की किस्मत, आधुनिक भट्टी से 50% खर्च घटा और कमाई हुई दोगुनी मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 100
शिवपुरी के जगदीश कुशवाह ने PMFME योजना का लाभ उठाकर अपने 60 साल पुराने मिठाई के कारोबार को हाईटेक बनाया है। स्टीम बॉयलर मशीन लगाने से उनकी ईंधन लागत आधी रह गई और मासिक आय बढ़कर 60-70 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

PMFME योजना ने संवारा पुस्तैनी कारोबार

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। ग्वालियर बायपास के निवासी और मिठाई व्यवसायी जगदीश कुशवाह ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना यानी PMFME का लाभ उठाकर न केवल अपने काम को आधुनिक बनाया है, बल्कि मुनाफा भी कई गुना बढ़ा लिया है। उनका 60 साल पुराना मिठाई का व्यवसाय अब नई तकनीक के सहारे तेजी से आगे बढ़ रहा है।

स्टीम बॉयलर से मिली राहत

जगदीश कुशवाह लंबे समय से मिठाई बनाने में आने वाली ईंधन की बढ़ती लागत से परेशान थे। जब उन्हें उद्यानिकी विभाग के जरिए PMFME योजना के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत आवेदन किया। योजना के तहत उन्हें 15.66 लाख रुपये का लोन मिला, जिस पर सरकार ने 35 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की। इस राशि से उन्होंने एक अत्याधुनिक स्टीम बॉयलर मशीन स्थापित की।

आधे से भी कम हुआ ईंधन का खर्च

इस बदलाव के नतीजों पर बात करते हुए जगदीश के बेटे प्रमोद ने बताया कि नई मशीन से काम बहुत आसान और किफायती हो गया है। उन्होंने कहा, 50 प्रतिशत ईंधन लागत में कमी आई है। पहले जिस काम के लिए 100 रुपये खर्च करने पड़ते थे, अब वही काम मात्र 50 रुपये में हो जाता है। उत्पादन क्षमता में वृद्धि के चलते उनकी मासिक आय जो पहले 30 से 40 हजार रुपये हुआ करती थी, वह अब बढ़कर 60 से 70 हजार रुपये हो गई है।

रोजगार के अवसर और आधुनिक कार्यप्रणाली

इस मिठाई प्रतिष्ठान में अब 6 स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिला है। दुकान पर रोजाना लगभग एक क्विंटल दूध आता है, जिससे शुद्ध मावा, रसगुल्ला, मलाई बर्फी, मिल्क केक और चमचम जैसी मिठाइयां तैयार की जाती हैं। प्रमोद ने बताया कि अब गैस सिलेंडरों का झंझट पूरी तरह खत्म हो गया है और वे पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक भट्टी पर निर्भर हैं। तीसरी पीढ़ी द्वारा संभाली जा रही यह दुकान आज आत्मनिर्भरता की एक मिसाल बनकर उभरी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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