मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
मध्य प्रदेश का शिवपुरी जिला सिर्फ अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने निराले खान-पान के लिए भी खूब पहचाना जाता है। यहां आने वाले लोगों के लिए कहा जाता है कि अगर ‘कस्टम गेट टेकरी’ के जायके का स्वाद नहीं चखा, तो उनकी यात्रा अधूरी ही रह गई। इसी रास्ते पर मौजूद ‘किशन हलवाई’ की दुकान वह ठिकाना है, जहां का स्पेशल मंगोड़ी और दही-बड़ा खाने के लिए लोग दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं। यहां का स्वाद ऐसा है कि देखते ही मुंह में पानी आ जाता है।
चार पीढ़ियों का भरोसा और वही पुराना स्वाद
कस्टम गेट टेकरी पर बनी किशन हलवाई की यह दुकान कोई साधारण दुकान नहीं, बल्कि स्वाद की एक पूरी विरासत है। पिछले 40 से ज्यादा सालों और चार पीढ़ियों से यह दुकान लगातार चल रही है। समय भले ही बदल गया हो, लेकिन इस दुकान की सबसे बड़ी खूबी यही है कि पहली पीढ़ी के दौर में जो स्वाद ग्राहकों को मिलता था, वही शुद्ध और लाजवाब स्वाद आज भी कायम है। यही कारण है कि लोग आज भी बड़े चाव से यहां दही-बड़ा खाने पहुंचते हैं। भीषण गर्मी में यहां का ठंडा-ठंडा दही-बड़ा जीभ को स्वाद देने के साथ-साथ शरीर और पेट को राहत भी देता है।
महंगाई के दौर में भी सिर्फ ₹10 में एक प्लेट
जिस समय हर छोटी-बड़ी खाद्य सामग्री के दाम आसमान छू रहे हैं, उस दौर में किशन हलवाई की दुकान महंगाई को सीधे मात दे रही है। दुकान चलाने वाली ममता अग्रवाल बताती हैं कि उनके लिए मुनाफे से कहीं ज्यादा ग्राहकों की संतुष्टि और परंपरा को जिंदा रखना अहम है। आज भी वे अपने ग्राहकों को महज ₹10 में बेहद स्वादिष्ट, शुद्ध और ताजा दही-बड़ा परोस रही हैं। इस काम में उनका बेटा भी पूरी लगन से उनका साथ देता है और इस पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है। यहां का दही-बड़ा अपनी खास मीठी-खट्टी चटनी और विशेष मसालों के मेल की वजह से हर किसी की पसंद बना हुआ है।
शुद्धता और ताजगी ही पहचान
ममता अग्रवाल के मुताबिक उनकी दुकान की सबसे बड़ी खासियत शुद्धता और ताजगी है। उनका कहना है कि बासी या ठंडे नाश्ते की यहां कोई जगह नहीं है। हर रोज सुबह सारा सामान बिल्कुल ताजा तैयार किया जाता है। दुकान सुबह 9:00 बजे खुलती है और रात 10:00 बजे तक ग्राहकों को सेवा देती रहती है। स्वाद के बारे में उन्होंने बताया कि बरसों के अनुभव और पारंपरिक मसालों के सही अनुपात की वजह से ही पिछले 40 सालों का स्वाद आज भी ज्यों का त्यों बना हुआ है, और यही कारण है कि यहां आने वाला हर ग्राहक संतुष्ट होकर लौटता है।
परंपरा निभाने के लिए नहीं बढ़ाए दाम
मुनाफे और महंगाई की होड़ से दूर रहकर इस दुकान ने अपने ग्राहकों से रिश्ता बनाए रखा है। ममता अग्रवाल कहती हैं कि महंगाई चाहे जितनी भी बढ़ जाए, ग्राहकों के प्यार और पुरानी पारिवारिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने रेट नहीं बदला है। आज भी वे ग्राहकों को सम्मान के साथ केवल ₹10 में एक प्लेट दही-बड़ा परोसती हैं। इस दुकान से उनकी रोजाना करीब 2 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है।
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