हिमाचल प्रदेश
5 घंटे पहले
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हिमाचल प्रदेश के पर्वतारोहियों ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी बहादुरी और तकनीकी कौशल का लोहा मनवाया है। राज्य के प्रतिभावान पर्वतारोही विशाल ठाकुर ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर हिमालय की जांस्कर रेंज में स्थित बेहद दुर्गम और चुनौतीपूर्ण चोटी नून पीक को सफलतापूर्वक फतह कर लिया है। समुद्र तल से इस चोटी की ऊंचाई करीब 23,409 फीट (7,135 मीटर) है। इस साहसिक और कठिन अभियान की सबसे खास बात यह रही कि पूरी टीम ने इसे महज चार दिनों के बेहद कम समय में पूरा कर लिया।
कारगिल के तांगोल से शुरू हुआ था रोमांचक सफर
इस बेहद कठिन अभियान की शुरुआत 26 अगस्त 2026 को कारगिल के तांगोल गांव से हुई थी। विशाल ठाकुर के नेतृत्व वाले इस चार सदस्यीय दल ने बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए आगे कदम बढ़ाए। अपनी कड़ी मेहनत और फौलादी इरादों के दम पर टीम ने सफलतापूर्वक चोटी पर कदम रखा और फिर सुरक्षित रूप से नीचे उतर आई। यह अभियान 30 अगस्त 2026 को वापस तांगोल गांव पहुंचने के साथ सुरक्षित और सफल तरीके से संपन्न हुआ।
चार सदस्यीय टीम में शामिल थे ये जांबाज
इस ऐतिहासिक चढ़ाई को पूरा करने वाले दल में कुल चार सदस्य शामिल थे। टीम की कमान विशाल ठाकुर के हाथों में थी। इस दल में उनके साथ निम्नलिखित जांबाज शामिल थे:
- विशाल ठाकुर (अभियान के लीडर)
- राहुल
- निकिता ठाकुर
- राकेश सिंह नेगी
मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के रहने वाले विशाल ठाकुर वर्तमान में चंडीगढ़ में निवास करते हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साधारण ट्रैकिंग से की थी, लेकिन अपने जुनून के दम पर आज वह एक पूर्णकालिक पर्वतारोही बन चुके हैं। वे न केवल खुद पर्वतारोहण करते हैं, बल्कि अन्य युवाओं को भी इसकी ट्रेनिंग देते हैं।
जानें क्यों इतनी कठिन और तकनीकी मानी जाती है नून पीक
नून पीक जांस्कर रेंज की बेहद मशहूर पर्वत श्रृंखला नून-कुन मैसिफ का एक हिस्सा है। इसी श्रृंखला में नून पीक की सिस्टर पीक यानी माउंट कुन भी स्थित है, जिसकी ऊंचाई 7,077 मीटर है। नून-कुन मैसिफ के इतिहास की बात करें तो इस पर सबसे पहला सफल आरोहण वर्ष 1953 में एक स्विस अभियान दल द्वारा किया गया था। तब से लेकर आज तक यह क्षेत्र पूरी दुनिया के पेशेवर पर्वतारोहियों के लिए भारतीय हिमालय के सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण क्लाइंबिंग क्षेत्रों में से एक माना जाता है।
पर्वतारोहण विशेषज्ञों के अनुसार, नून पीक को एक अत्यधिक तकनीकी ग्रेड की चोटी माना जाता है। इस चोटी पर फतह हासिल करने के लिए सिर्फ हौसला ही काफी नहीं होता, बल्कि इसके लिए विशेष पर्वतारोहण उपकरणों के इस्तेमाल में गहरी विशेषज्ञता, बेजोड़ क्लाइंबिंग कौशल, अत्यधिक ऊंचाई पर सही निर्णय लेने की क्षमता और बेहद विपरीत परिस्थितियों में सुरक्षित रहने का लंबा अनुभव होना बेहद जरूरी है। 7,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर पर्वतारोहियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- पल-पल बदलता खतरनाक मौसम
- अत्यधिक दुर्गम और खड़ी चढ़ाई वाला भूभाग
- हवा में ऑक्सीजन की भारी कमी
- अत्यधिक ठंड और हिमस्खलन का खतरा
नेहरू इंस्टीट्यूट से लिया है कड़ा प्रशिक्षण
विशाल ठाकुर ने पर्वतारोहण की बुनियादी और उच्च तकनीक की बारीकियां उत्तरकाशी स्थित विख्यात संस्थान नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से सीखी हैं। वहां से कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद विशाल ने एक के बाद एक कई बड़ी चोटियों को फतह किया है। नून पीक की यह बड़ी सफलता उनके पिछले शानदार अभियानों की कड़ी का ही एक हिस्सा है।
इससे पहले पिछले वर्ष विशाल ने अपनी टीम के साथ मिलकर हिमाचल प्रदेश के स्पीति क्षेत्र में स्थित दुर्गम मणिरंग पीक को रिकॉर्ड समय में फतह करके सबको चौंका दिया था। इसके अलावा वे उत्तराखंड की प्रसिद्ध ब्लैक पीक, मनाली की फ्रेंडशिप पीक और युनाम पीक जैसी कई तकनीकी रूप से कठिन चोटियों पर भी सफलतापूर्वक तिरंगा फहरा चुके हैं। इस विशेष नून पीक अभियान पर जाने से पहले टीम ने नई दिल्ली स्थित इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन से सभी आवश्यक परमिट और सरकारी मंजूरियां हासिल की थीं।
“यह सिर्फ ऊंचाई छूने की बात नहीं थी”
अपनी इस शानदार कामयाबी पर बात करते हुए पर्वतारोही विशाल ठाकुर ने कहा,
“नून पीक पर चढ़ाई करना हमारे लिए केवल 7,135 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने का एक साधारण लक्ष्य नहीं था। यह वास्तव में हमारे तकनीकी कौशल, धैर्य, कड़े अनुशासन और टीमवर्क की एक अग्निपरीक्षा थी। इतनी ऊंचाई पर जाने के बाद पहाड़ आपको हर कदम पर चुनौती देता है। वहां एक छोटी सी गलती भी भारी पड़ सकती है, इसलिए सही समय पर सही फैसला लेना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। केवल चार दिनों के भीतर इस कठिन अभियान को पूरा करना और अपनी पूरी टीम के साथ सुरक्षित वापस लौटना ही मेरे लिए इस जीत का सबसे खूबसूरत और अहम हिस्सा है।”
भारत में पर्वतारोहण संस्कृति को बढ़ावा देना है लक्ष्य
विशाल ठाकुर का दृढ़ विश्वास है कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र में दुनिया के सबसे बेहतरीन और रोमांचक पर्वतारोहण क्षेत्रों में शुमार होने की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। अपने इन साहसिक अभियानों के जरिए वे अधिक से अधिक अनुभवी पर्वतारोहियों और प्रशिक्षित युवाओं को तकनीकी माउंटेनियरिंग की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य भारत में एक मजबूत पर्वतारोहण और साहसिक अभियान संस्कृति विकसित करना है, ताकि देश के युवा इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
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