हिमाचल प्रदेश
4 घंटे पहले
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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बीते सायं नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास तथा शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की। इस भेंट में मुख्यमंत्री ने मुफ्त बिजली रॉयल्टी, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के बकाये और राज्य की शहरी परियोजनाओं को लेकर कई अहम मुद्दे रखे, साथ ही पंजाब और हरियाणा के पास अटकी राशि राज्य को दिलाने की पैरवी की।
बिजली रॉयल्टी की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में जिन परियोजनाओं की प्रारंभिक 12 वर्षों की अवधि पूरी हो चुकी है, उनमें सामान्य 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी के अतिरिक्त निःशुल्क बिजली रॉयल्टी की हिस्सेदारी को और बढ़ाया जाए।
उन्होंने 180 मेगावाट की बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके संचालन के 44 वर्ष पूरे हो चुके हैं, ऐसे में इस परियोजना में निःशुल्क बिजली की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाना चाहिए।
बीबीएमबी बकाये पर 7,784 करोड़ का सवाल
सुक्खू ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की परियोजनाओं में राज्य को मिलने वाले ऊर्जा बकाये के भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण के समय प्रदेश के लोगों ने भारी कठिनाइयों का सामना किया और हजारों लोगों को विस्थापन झेलना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभाव सहने पड़े और पौंग बांध से विस्थापित लोगों का पुनर्वास आज तक पूरी तरह नहीं हो पाया है। उन्होंने आग्रह किया कि हरियाणा और पंजाब दोनों अपनी सहमति देकर 31 अक्तूबर, 2011 तक के 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाये के साथ-साथ उसके बाद का 6 प्रतिशत ब्याज भी राज्य को उपलब्ध कराएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह ऊर्जा बकाया धनराशि के रूप में चुकाया जाता है तो 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज की दर से अब तक की गणना के अनुसार यह राशि अनुमानित रूप से 7,784 करोड़ रुपये बनती है।
शानन परियोजना पर राज्य का अधिकार
मुख्यमंत्री ने शानन जलविद्युत परियोजना की पृष्ठभूमि से भी केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया और इस परियोजना पर हिमाचल के वैध अधिकार का पक्ष मजबूती से रखा।
एयरो सिटी और हिम चंडीगढ़ के लिए मदद
सुक्खू ने कांगड़ा में प्रस्तावित ‘एयरो सिटी’ तथा ‘हिम चंडीगढ़’ के विकास के लिए केंद्रीय मंत्री से वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं का मकसद राज्य में सुनियोजित शहरीकरण, आर्थिक विकास, पर्यटन और निवेश को गति देना है।
शहरी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता का अनुरोध
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी कि राज्य सरकार ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के अंतर्गत 24 शहरी स्थानीय निकायों में 1,179 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित कर रही है। इनमें से 660 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले चरण में भारत सरकार को भेजी जा चुकी हैं।
उन्होंने ‘क्लीन हिली एंड हिमालयन सिटीज़ इनिशिएटिव’ के तहत स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से जुड़े कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए 12.33 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध किया। इसके साथ ही अमृत योजना के अंतर्गत पूर्व में स्वीकृत परियोजनाओं के लिए शेष 64.45 करोड़ रुपये जारी करने की मांग भी रखी।
मुख्यमंत्री ने भारत सरकार को अनुमोदन के लिए भेजी गई अमृत मित्रा योजना के तहत 14 शहरी स्थानीय निकायों में 43 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह भी किया।
क्यूआर आधारित डिजिटल डोर प्लेट योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि शहरी स्थानीय निकायों में हर संपत्ति को विशिष्ट पहचान देने के उद्देश्य से क्यूआर-आधारित डिजिटल डोर प्लेट प्रणाली राज्य में प्रक्रियाधीन है। उन्होंने इस परियोजना के दूसरे चरण के सफल क्रियान्वयन के लिए आगामी पांच वर्षों में 18 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया।
बैठक में मौजूद अधिकारी
इस बैठक में मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह और ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी उपस्थित रहे।
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