आखिरी 75 मिनट में सेंसेक्स में 500 अंकों की बड़ी गिरावट, क्या लॉन्ग वीकेंड की वजह से सहमे निवेशक? व्यापार एक महीने पहले 55
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार के अंतिम क्षणों में अचानक बिकवाली देखी गई, जिससे सेंसेक्स ऊपरी स्तरों से 500 पॉइंट फिसल गया। जानकारों का मानना है कि मुहर्रम की छुट्टी के चलते निवेशक जोखिम कम करने के लिए मुनाफावसूली कर रहे थे।

बाजार में अचानक आई बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो दिनों से जारी रिकॉर्ड तेजी पर गुरुवार, 25 जून को ब्रेक लग गया। दिन भर के कारोबार में शानदार प्रदर्शन के बाद बाजार में आखिरी 75 मिनट में भारी हलचल देखने को मिली। दोपहर करीब 1:50 बजे तक 77,594 के स्तर पर रहने वाला सेंसेक्स देखते ही देखते 500 पॉइंट नीचे गिरकर 3:05 बजे तक 77,095 के स्तर तक आ गया।

मुनाफावसूली का दौर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शुक्रवार को मुहर्रम के कारण बाजार में अवकाश है। इस कारण लॉन्ग वीकेंड शुरू होने से पहले निवेशक अपनी जोखिम क्षमता को नियंत्रित करना चाह रहे थे और उन्होंने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। एक्विरस वेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर पुंज के अनुसार, लंबी छुट्टी से पहले अपनी पोजीशन को हल्का करने की होड़ में बाजार में यह गिरावट दर्ज की गई।

बाजार का समापन और आगे की स्थिति

दिन के अंत में बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई और बीएसई सेंसेक्स 0.14 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 भी 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,056 के स्तर पर समाप्त हुआ। इस उतार-चढ़ाव भरे सत्र के दौरान एविएशन और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में निवेशकों की अच्छी दिलचस्पी देखी गई।

बाजार को मिल सकता है सहारा

बजाज फिनसर्व एएमसी का दृष्टिकोण है कि कम मॉनसून बाजार के लिए एक अल्पकालिक जोखिम जरूर है, लेकिन बाजार को आगे भी मजबूती मिलती रहेगी। उन्होंने बताया कि निम्नलिखित कारक भविष्य में बाजार को सपोर्ट देंगे:

  • आरबीआई द्वारा विदेशी मुद्रा जमा जुटाने का निर्णय।
  • विदेशी निवेशकों के लिए बॉन्ड टैक्स हटाने का सरकार का फैसला।
  • बाजार में विदेशी फंड्स का लगातार बना रहने वाला प्रवाह।
राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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