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3 घंटे पहले
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नवरात्रि का पांचवां दिन: मां स्कंदमाता की आराधना
शारदीय नवरात्रि का उत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप यानी मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना का विधान है। पंचांग के अनुसार, आज 15 अक्टूबर 2026 को पंचमी तिथि पर भक्त मां स्कंदमाता को नमन कर रहे हैं। मां स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत ममतामयी और वात्सल्यपूर्ण माना जाता है क्योंकि उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से उनकी शरण में आते हैं, मां उनके परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
मां स्कंदमाता का स्वरूप और महत्व
मां स्कंदमाता का नाम भगवान कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद के नाम से भी जाना जाता है, पर रखा गया है। कार्तिकेय देवताओं के सेनापति हैं और मां उनकी माता हैं, इसलिए उन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। मां का स्वरूप चार भुजाओं वाला है। उनके दो हाथों में कमल के फूल शोभा बढ़ाते हैं, एक हाथ अभय मुद्रा में भक्तों को आशीर्वाद देता है और एक हाथ से उन्होंने बाल स्वरूप कार्तिकेय को गोद में थाम रखा है। कमल पर विराजने के कारण उन्हें पद्मासना देवी के नाम से भी पुकारा जाता है। उनका वाहन सिंह है। भक्त इस दिन विशेष रूप से अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और घर की सुख-शांति के लिए देवी से प्रार्थना करते हैं।
पूजा विधि और भोग
नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करने के बाद मां स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। पूजा के दौरान मां को विशेष रूप से केले का भोग लगाने की परंपरा है। माना जाता है कि केले का भोग लगाने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। इसके साथ ही फल, फूल, धूप और दीप जलाकर माता की विधि-विधान से पूजा करें। मां स्कंदमाता को पीला रंग बहुत प्रिय है, इसलिए संभव हो तो पूजा में पीले वस्त्रों और फूलों का उपयोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
मंत्र और प्रार्थना
पूजा के समय श्रद्धापूर्वक मंत्रों का उच्चारण करना फलदायी होता है। भक्त 'ॐ देवी स्कंदमातायै नमः' का जाप कर सकते हैं। इसके बाद मां की आरती गाकर उनसे परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना करें। यह दिन साहस और वात्सल्य की शक्ति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंदमाता की पूजा से भक्त को मोक्ष का मार्ग मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आज के दिन भक्त पूरे विधि-विधान से मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं।
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