शरद पवार अस्पताल में भर्ती, एनसीपी के दो गुटों के विलय की चर्चा ने पकड़ा जोर भारत एक घंटा पहले 4
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के अस्पताल में भर्ती होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में विलय की अटकलें तेज हो गई हैं। वहीं, अजित पवार की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच बढ़ते असंतोष और दिल्ली में हुई मुलाकातों ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

विलय पर छिड़ा बयानों का दौर

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी के दोनों धड़ों के आपस में मिलने की चर्चाओं ने फिर से महाराष्ट्र की सियासत को गरमा दिया है। इस पूरे मामले पर एनसीपी नेता सुनील तटकरे के हालिया बयान ने एक नई बहस को जन्म दिया है। तटकरे के दावे पर पलटवार करते हुए एनसीपी (एसपी) के नेता अनिल देशमुख ने सवाल खड़े किए हैं। अनिल देशमुख का कहना है कि जब अजित पवार जीवित थे, तब दोनों गुटों के बीच एक साथ आने का निर्णय लिया गया था और इसके लिए एक तारीख भी निर्धारित की गई थी। लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में अजित पवार का निधन हो गया। अनिल देशमुख ने आगे कहा कि जब यह मुद्दा फिर से सामने आया था, तब सुनील तटकरे ने किसी भी प्रकार की बातचीत होने से साफ इनकार कर दिया था। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि तटकरे अब यह कह रहे हैं कि बातचीत हुई थी। देशमुख ने पूछा कि दो साल पहले उन्होंने गलत बयान क्यों दिया था और वे किसके दबाव में थे।

क्या होगा एनसीपी का विलय?

पार्टी के विलय को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच एनसीपी (एसपी) नेता अनीश गवांडे ने स्पष्ट किया है कि कोई भी नेता अगर उनके साथ जुड़ना चाहता है तो उनका स्वागत है। हाल ही में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती शरद पवार से मिलने के बाद शिवसेना नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर ने अपनी भावनाएं साझा कीं। अहीर ने कहा कि उनकी शरद पवार के साथ विस्तार से बातचीत हुई। उन्होंने याद किया कि कैसे शरद पवार ने उन्हें और उनके जैसे तमाम लोगों को गढ़ने में अहम भूमिका निभाई है। अहीर ने कहा कि शरद पवार की मौजूदा स्थिति को देखकर दुख होता है, खासकर जब वे उनके पुराने और बेहद सक्रिय दिनों को याद करते हैं। उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने शरद पवार से आग्रह किया है कि वे थोड़ा आराम करें और अपने दौरों में कटौती करें। हालांकि, शरद पवार आसानी से मानने वालों में से नहीं हैं। याद रहे कि हाल ही में सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। डॉक्टरों के अनुसार अब उनकी हालत स्थिर है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।

10 नवंबर की महत्वपूर्ण बैठक

क्या वाकई नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का एक धड़ा शरद पवार के खेमे में विलय की दिशा में बढ़ रहा है? या फिर अजित पवार की पार्टी के वरिष्ठ नेता अपनी पार्टी के नेतृत्व को लेकर सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार पर दबाव बना रहे हैं? इन सवालों के बीच 5 नवंबर को ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुई शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की मुलाकात ने चर्चाओं को और बल दिया है। जानकारी के अनुसार, शरद पवार ने प्रफुल्ल पटेल से कहा कि वे 10 नवंबर के बाद इस विषय पर बैठकर बात कर सकते हैं। इसके जवाब में प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि उस तारीख के बाद वे मुंबई में ही होंगे और शरद पवार जब भी समय तय करेंगे, वे मिलने के लिए तैयार हैं। हालांकि, प्रफुल्ल पटेल का कहना है कि यह केवल कुशलक्षेम पूछने के लिए एक शिष्टाचार मुलाकात थी, लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि इसके पीछे बड़े राजनीतिक निहितार्थ छिपे हो सकते हैं।

सुनील तटकरे और रोहित पवार के अलग-अलग दावे

प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे का आधिकारिक रुख यह है कि फिलहाल विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं चल रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर अजित पवार जीवित होते, तो दोनों गुटों का विलय हो चुका होता। तटकरे ने यह भी संकेत दिया कि यदि अजित पवार मौजूद होते, तो विलय के लिए चर्चा में चल रही 12 फरवरी की तारीख को अंतिम रूप दिया जा सकता था। दूसरी ओर, एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने अलग दावा किया है। उनका कहना है कि विलय तो पूरी तरह तय था और अजित पवार खुद चाहते थे कि उनका परिवार एकजुट रहे। रोहित पवार ने सुनील तटकरे के बदलते बयानों पर निशाना साधते हुए कहा कि अजित पवार के राजनीतिक अंत के दस दिनों के भीतर ही तटकरे ने किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया था। रोहित पवार का मानना है कि इन बयानों के पीछे कोई सोची-समझी राजनीतिक रणनीति हो सकती है।

दिल्ली से मुंबई तक सियासत का असर

अजित पवार की पार्टी के अंदर बढ़ता असंतोष इन घटनाक्रमों को नया मोड़ दे रहा है। खबर है कि पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं, जिनमें प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, दिलीप वलसे पाटिल और धनंजय मुंडे शामिल हैं, ने 2 नवंबर को दिल्ली जाकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस प्रतिनिधिमंडल में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार शामिल नहीं थे। सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं ने पार्टी में सामूहिक नेतृत्व, आंतरिक विचार-विमर्श और पार्थ पवार के बढ़ते प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। हालांकि, आधिकारिक रूप से एनसीपी ने किसी भी आंतरिक कलह से इनकार करते हुए इसे पहले से तय बैठक करार दिया है।

प्रधानमंत्री की शरद पवार से बातचीत

इस बीच, शरद पवार के करीबी सहयोगी विट्ठल मनियार ने एक बड़ी जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद शरद पवार को फोन किया। प्रधानमंत्री ने शरद पवार का हाल पूछा और कहा कि सुप्रिया सुले और वे खुद देश का ख्याल रखेंगे। उन्होंने शरद पवार से अपना ख्याल रखने और आशीर्वाद देने के लिए मजबूत बने रहने की बात कही। फिलहाल, 10 नवंबर के बाद होने वाली बैठकों और विलय को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं के बीच, एनसीपी के भविष्य को लेकर दो बड़े सवाल बने हुए हैं। पहला यह कि क्या दोनों गुट फिर एक हो पाएंगे, और दूसरा यह कि अजित पवार के बाद पार्टी की बागडोर किसके हाथों में होगी?

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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