शाजापुर में पुलिस नदारद, मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति संभालता रहा ट्रैफिक का जिम्मा मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 65
मध्य प्रदेश के शाजापुर में यातायात व्यवस्था की पोल खोलने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस की गैरमौजूदगी में एक मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति घंटों तक चौराहे पर गाड़ियां संचालित करता रहा।

चौराहे पर अनोखा ड्रामा

मध्य प्रदेश के शाजापुर शहर से एक बेहद हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के एक प्रमुख व्यस्त ट्रैफिक पॉइंट पर उस समय लोगों का जमावड़ा लग गया, जब एक मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति ने चौराहे को अपना कार्यक्षेत्र बना लिया। खुद को ट्रैफिक पुलिसकर्मी मानकर वह पूरी गंभीरता के साथ सड़क के बीचों-बीच खड़ा हो गया और आने-जाने वाले वाहनों को रोकने और निकालने के निर्देश देने लगा। यह सिलसिला करीब दो घंटे तक लगातार चलता रहा। हैरानी की बात यह है कि इतनी लंबी अवधि तक यह हाई-वोल्टेज ड्रामा जारी रहा, लेकिन इलाके में यातायात को सुचारू रखने के लिए जिम्मेदार कोई भी पुलिसकर्मी या अधिकारी उसे वहां से हटाने के लिए नहीं आया। हालांकि, वहां से गुजरने वाले राहगीरों ने इस स्थिति को मनोरंजन के रूप में लिया, लेकिन इस घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक निगरानी के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

वाहनों के साथ इशारों का खेल

शाजापुर के जिस चौराहे पर यह वाकया हुआ, वह शहर के सबसे व्यस्त रास्तों में गिना जाता है। वहां उस समय हर कोई दंग रह गया जब एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति ने पूरी तरह से एक प्रशिक्षित सिपाही की तरह बर्ताव करना शुरू कर दिया। वह बड़े आत्मविश्वास के साथ अपने हाथों के इशारों से गाड़ियों को रुकने और आगे बढ़ने का संकेत देता रहा। सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि सड़क पर चल रहे कई वाहन चालकों ने उसे सचमुच का पुलिसकर्मी समझ लिया और उसके इशारों का पालन करना शुरू कर दिया। इस अजीबोगरीब दृश्य को देखकर आसपास मौजूद लोग ठहाके लगाते रहे और कई लोगों ने इस घटना को अपने मोबाइल फोन के कैमरे में कैद कर लिया। पूरे दो घंटे तक वह चौराहा लोगों के लिए हंसी-मजाक का केंद्र बना रहा।

पुलिस की सक्रियता पर खड़े हुए सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने जहां लोगों के मनोरंजन का साधन दिया, वहीं इसके पीछे का सच बेहद चिंताजनक है। जिस व्यस्त पॉइंट पर चौबीसों घंटे ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और निगरानी होनी चाहिए थी, वहां घटना के दौरान कोई भी सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था। पुलिस की इसी लापरवाही और गैरमौजूदगी के कारण उस व्यक्ति को बिना किसी डर या रोक-टोक के लंबे समय तक चौराहे पर कब्जा करने का मौका मिला।

हादसे का डर और प्रशासन की ढिलाई

गनीमत रही कि इस पूरी अवधि के दौरान कोई बड़ा सड़क हादसा या अप्रिय घटना घटित नहीं हुई, जबकि वाहनों का अचानक रुकना और चलना किसी भी समय बड़े खतरे का कारण बन सकता था। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और यातायात विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। लोग अब पूछ रहे हैं कि शहर के इतने मुख्य और व्यस्त चौराहे पर घंटों तक अव्यवस्था बनी रही, फिर भी कंट्रोल रूम या संबंधित विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली?

सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल

वर्तमान में इस तथाकथित ट्रैफिक कंट्रोलर का वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। वीडियो को देखकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि अधिकांश लोग इसे एक हल्के-फुल्के मजाक की तरह देख रहे हैं, लेकिन यह घटना एक बड़ी चेतावनी है। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि व्यस्त चौराहों पर पुलिस की निरंतर मौजूदगी और यातायात की सटीक मॉनिटरिंग कितनी अनिवार्य है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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