बिहार
एक घंटा पहले
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तिल की खेती: किसानों के लिए मुनाफे का नया जरिया
भोजपुर जिले के गंगा और सोन नदी के तटीय इलाकों में किसान अब तिल की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. शोभा रानी के अनुसार, तिल एक बेहतरीन नकदी फसल है जो धान की तुलना में कहीं अधिक फायदेमंद साबित हो रही है। इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें न केवल पानी की खपत बहुत कम होती है, बल्कि खेती की कुल लागत भी नाममात्र की रहती है।
कम लागत और अधिक मुनाफा
धान की खेती में खाद, मजदूरी और सिंचाई पर होने वाले भारी खर्च के मुकाबले तिल की खेती बहुत सस्ती पड़ती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तिल उन क्षेत्रों के लिए वरदान है जहां सिंचाई के साधन सीमित हैं या समय पर बारिश नहीं होती। डॉ. शोभा रानी के मुताबिक, किसान प्रति बीघा ₹35,000 तक का शुद्ध मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं।
तिल की खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियां
- मिट्टी का चयन: दोमट मिट्टी तिल की पैदावार के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
- जल निकासी: तिल के लिए ऐसे खेतों का चयन करना चाहिए जहां पानी का ठहराव न हो, क्योंकि जलभराव फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।
- बाजार की मांग: खाद्य तेल, बेकरी उत्पादों, मिठाइयों और औषधियों में निरंतर उपयोग के कारण बाजार में इसकी मांग सालभर बनी रहती है।
किसानों के लिए क्यों बेहतर विकल्प है तिल?
बदलते मौसम और अनिश्चित मानसून के दौर में तिल को कम जोखिम वाली फसल माना जाता है। चूंकि तिल का निर्यात भी किया जाता है, इसलिए किसानों को अपनी उपज का बाजार में बेहतर मूल्य मिल जाता है। सोन और गंगा के तटवर्ती इलाकों के किसान यदि पारंपरिक धान की जगह या उसके साथ तिल को अपनाते हैं, तो उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है। यह खेती कम संसाधनों में अधिक आय अर्जित करने का एक सफल मॉडल बन चुकी है।
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