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सितंबर महीने का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की शुरुआत और सितंबर का महीना भक्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। जैसे ही अगस्त का महीना समाप्त होता है, सितंबर के आगमन के साथ ही चारों तरफ व्रत और त्योहारों की बहार छा जाती है। उज्जैन के जाने-माने आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, यह महीना श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर आता है। इस पूरे महीने में कई बड़े पर्व और अनुष्ठान किए जाएंगे, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि जनमानस को आस्था के सूत्र में बांधते हैं। इस बार सितंबर 2026 में कजरी तीज, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी और वामन जयंती जैसे प्रमुख पर्वों की धूम रहेगी। इसके साथ ही अजा एकादशी और परिवर्तिनी एकादशी जैसे महत्वपूर्ण व्रत भी इसी महीने में पड़ रहे हैं।
सितंबर 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार
धार्मिक उत्सवों के कैलेंडर के अनुसार सितंबर महीने की तिथियां और त्योहार इस प्रकार हैं:
- 4 सितंबर (शुक्रवार): कृष्ण जन्माष्टमी का भव्य आयोजन।
- 5 सितंबर (शनिवार): दही हांडी उत्सव और शिक्षक दिवस।
- 7 सितंबर (सोमवार): अजा एकादशी व्रत।
- 8 सितंबर (मंगलवार): भौम प्रदोष व्रत और पर्यूषण पर्व की शुरुआत।
- 9 सितंबर (बुधवार): मासिक शिवरात्रि का व्रत।
- 14 सितंबर (सोमवार): हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का महापर्व, इसी दिन से गणेश उत्सव का शुभारंभ होगा।
- 15 सितंबर (मंगलवार): ऋषि पंचमी।
- 17 सितंबर (गुरुवार): विश्वकर्मा पूजा और कन्या संक्रांति।
- 19 सितंबर (शनिवार): राधा अष्टमी।
- 22 सितंबर (मंगलवार): परिवर्तिनी एकादशी।
- 24 सितंबर (गुरुवार): गुरु प्रदोष व्रत।
- 25 सितंबर (शुक्रवार): अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन का दिन।
- 26 सितंबर (शनिवार): भाद्रपद पूर्णिमा व्रत।
- 27 सितंबर (रविवार): पितृ पक्ष की शुरुआत।
भाद्रपद मास में क्या करें
भाद्रपद के महीने को धर्म और सेवा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। आचार्य आनंद भारद्वाज का सुझाव है कि इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण और विघ्नहर्ता गणेश जी की आराधना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। भक्तों को चाहिए कि वे अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद करें और दान-पुण्य का कार्य करें। इसके साथ ही मन में सकारात्मक भाव रखें और भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल अर्पित करना बहुत फलदायी माना गया है। यह महीना भक्ति और परोपकार के समन्वय का समय है, जिसका लाभ सभी श्रद्धालुओं को उठाना चाहिए। पूरे माह में चलने वाले इन धार्मिक आयोजनों से वातावरण में सकारात्मकता और श्रद्धा का संचार बना रहेगा।
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