बिहार में जिसे कचरा समझकर फेंकते हैं लोग, उसी सूखी मछली से छपरा के युवा कमा रहे हैं लाखों बिहार एक दिन पहले 14
बिहार के सारण जिले में युवा एक अनोखे बिजनेस के जरिए आर्थिक मजबूती हासिल कर रहे हैं। जिस मछली को स्थानीय स्तर पर बेकार समझा जाता है, उसे सुखाकर दूसरे राज्यों में बेचकर ये युवा मोटी कमाई कर रहे हैं।

बेकार मछली से हो रही है बंपर कमाई

बिहार के सारण जिले में युवाओं का एक समूह इन दिनों मछली के व्यापार से अपनी किस्मत बदल रहा है। यह कोई आम मछली का व्यापार नहीं है, बल्कि उस उत्पाद का है जिसे बिहार के ज्यादातर हिस्सों में लोग फेंक देते हैं या बेकार समझते हैं। छपरा जिले के दिघवारा प्रखंड के नयागांव और आसपास के क्षेत्रों के युवा व्यवसायी इस काम को बेहद कुशलता से कर रहे हैं। ये लोग उन मछलियों को इकट्ठा करते हैं जिन्हें लोग बाजार या तालाबों के किनारे बेकार मानकर छोड़ देते हैं, और फिर उन्हें प्रोसेस करके बंगाल, ओडिशा और केरल जैसे राज्यों में भेजते हैं। इस अनोखे काम ने यहां के युवाओं के लिए आय का एक बड़ा जरिया खोल दिया है।

किस तरह तैयार होती है सूखी मछली

इस कारोबार का तरीका काफी सरल है, लेकिन इसमें मेहनत और समय की जरूरत होती है। व्यवसायी सुबह तड़के ही स्थानीय मछली मंडियों, तालाबों और जलाशयों के पास पहुंच जाते हैं। वहां से वे उन मछलियों को चुनते हैं या कम दाम में खरीद लेते हैं जिन्हें आम ग्राहक नहीं खरीदते। इसके बाद शुरू होती है सुखाने की प्रक्रिया:

  • सबसे पहले इन मछलियों को अच्छी तरह साफ किया जाता है।
  • साफ करने के बाद इन्हें तेज धूप में लंबे समय तक सुखाया जाता है ताकि इनमें नमी बिल्कुल न रहे।
  • जब मछली पूरी तरह से सूख जाती है, तो उसे बोरियों में पैक कर दिया जाता है।
  • अंत में, व्यापारियों से संपर्क कर गाड़ियों के जरिए इन्हें अन्य राज्यों में भेज दिया जाता है।

खास बात यह है कि बिहार में जिस मछली को लोग बेकार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, दूसरे राज्यों में उसकी मांग काफी अधिक रहती है। कई मामलों में तो सूखी मछली की कीमत ताजी मछली की तुलना में भी कहीं ज्यादा मिल जाती है, जिससे मुनाफा दोगुना हो जाता है।

कम निवेश और शानदार मुनाफा

स्थानीय स्तर पर सूखी मछली के इस कारोबार से जुड़े नूमी कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे अपने चार-पांच दोस्तों के साथ मिलकर इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं। नूमी कुमार का कहना है कि वे ग्रामीण इलाकों, स्थानीय मार्केट और तालाबों से मछलियां जुटाते हैं। कई बार तो यह मछलियां उन्हें बिना किसी लागत के ही मिल जाती हैं। इस काम में निवेश बहुत कम है, लेकिन मुनाफा काफी शानदार होता है।

नूमी कुमार के अनुसार, उनके क्षेत्र में सूखी मछली का यह व्यवसाय पिछली दो पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह काम स्थानीय युवाओं के लिए एक बड़े वरदान की तरह है क्योंकि उन्हें रोजगार की तलाश में राज्य से बाहर पलायन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इस व्यवसाय से हुई कमाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज कई परिवारों ने इसी के दम पर अपने पक्के मकान बना लिए हैं। इसके अलावा, उन्होंने जमीनें खरीदी हैं और अपने बच्चों को बेहतरीन स्कूलों में शिक्षा दिला रहे हैं। यह काम न केवल आर्थिक रूप से युवाओं को सशक्त बना रहा है, बल्कि उन्हें अपने ही घर के पास आत्मनिर्भर भी बना रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!