बुंदेलखंड का पहला रोपवे टिकीटोरिया में, 300 फीट ऊंची पहाड़ी का सफर अब महज 2 मिनट में मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
सागर जिले के टिकीटोरिया स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर तक श्रद्धालुओं की पहुंच आसान बनाने के लिए 17 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से बुंदेलखंड का पहला रोपवे बनाया जा रहा है, जो नए साल 2027 में शुरू होने की संभावना है।

सागर जिले में हरे-भरे पेड़ों से घिरी एक ऊंची पहाड़ी पर बना मां विंध्यवासिनी का संगमरमर निर्मित मंदिर पूरे क्षेत्र के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। दिव्य और भव्य इस दरबार को लोग 'मिनी मैहर' के नाम से पुकारते हैं, जबकि यह पूरा क्षेत्र टिकीटोरिया के नाम से प्रसिद्ध है। अब इसी तीर्थ क्षेत्र में बुंदेलखंड का पहला रोपवे आकार ले रहा है, जिससे श्रद्धालुओं की दर्शन की राह बेहद आसान हो जाएगी।

300 से अधिक सीढ़ियों की चढ़ाई की चुनौती

मंदिर परिसर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 300 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो हर किसी के बस की बात नहीं है। खासकर बीमार और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के मन में दर्शन की लालसा तो बनी रहती है, लेकिन इतनी लंबी चढ़ाई देखकर वे हिम्मत नहीं जुटा पाते। इसके बावजूद यहां रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां स्थाई रूप से 40 से अधिक प्रसाद और नाश्ते की दुकानें लगी रहती हैं।

17 करोड़ 28 लाख की लागत से निर्माण

तीर्थ क्षेत्र में आने वाले हर श्रद्धालु की दर्शन की अभिलाषा पूरी हो सके, इसी मकसद से 17 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च कर रोपवे का निर्माण कराया जा रहा है। करीब 3 महीने से इसका काम चल रहा है और नए साल 2027 में इसके पूरा होकर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। यह बुंदेलखंड का पहला रोपवे होगा। यहां अंतरराष्ट्रीय फेनिकुलर तकनीक से रोपवे बनाने का काम जारी है।

क्या है फेनिकुलर तकनीक

इस तकनीक में श्रद्धालुओं को लाने और ले जाने वाली दो ट्रॉली होती हैं, जिनमें से एक ऊपर की ओर जाती है और दूसरी नीचे की ओर आती है। खास बात यह है कि ये दोनों ट्रॉली हवा में नहीं लटकतीं, बल्कि ट्रेन की तरह एक ट्रैक पर ऊपर-नीचे आती-जाती हैं। इससे बिजली की बचत भी होती है और दुर्घटना की आशंका भी न के बराबर रहती है। इस रोपवे की लंबाई 250 मीटर है।

15 से 30 मिनट की चढ़ाई अब 2 से 3 मिनट में

रोपवे बन जाने के बाद श्रद्धालुओं को सीढ़ियां चढ़ने में लगने वाला लगभग 15 से 30 मिनट का समय घटकर महज दो से तीन मिनट रह जाएगा और थकान भी नहीं होगी। बता दें कि इसे बनाने का काम करीब ढाई साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन किसी कारणवश मामला अटक गया था। पिछले दो-तीन महीने से काम दोबारा शुरू होकर तेज गति से चल रहा है और 18 महीने में पूरा होने वाला यह काम एक साल में निपटने की संभावना जताई जा रही है।

ढाई सौ साल पुराना सिद्ध क्षेत्र

यह सिद्ध क्षेत्र मंदिर सागर की मराठा शासनकाल की रानी रहीं लक्ष्मीबाई खेर ने करीब ढाई सौ साल पहले बनवाया था, जो उस समय केवल पहाड़ी पर ही स्थित था। पिछले 30-40 सालों से एक समिति के गठन के बाद यहां लगातार अलग-अलग तरह के काम कराए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिल रही है और वे आराम से दर्शन तथा पूजन-अर्चना कर पा रहे हैं। इसी कड़ी में क्षेत्रीय विधायक गोपाल भार्गव की पहल पर केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय की सहायता से बुंदेलखंड के इस पहले रोपवे का निर्माण किया जा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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