सागर का एक और सितारा मुंबई में चमका: ज्ञानचंद अहिरवार को मिली 6 फिल्में, एक्टिंग से जीता दर्शकों का दिल मध्य प्रदेश एक महीने पहले 45
मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले ज्ञानचंद अहिरवार ने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में अपनी खास पहचान बनाई है। मकरोनिया के इस युवा कलाकार को अब तक 6 फिल्मों में काम मिल चुका है।

सागर से मायानगरी तक का सफर

मध्य प्रदेश के सागर जिले का नाम फिल्म जगत में एक बार फिर चर्चा में है। आशुतोष राणा और मुकेश तिवारी जैसे दिग्गज कलाकारों के बाद, अब सागर के मकरोनिया निवासी ज्ञानचंद अहिरवार ने मुंबई में अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ज्ञानचंद को एक के बाद एक 6 फिल्मों में काम करने का अवसर मिला है, जिनमें से 3 फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी हैं और 3 अन्य जल्द ही पर्दे पर दस्तक देने वाली हैं।

शिक्षा और अभिनय की बारीकियां

ज्ञानचंद ने अपनी उच्च शिक्षा सागर की डॉक्टर हरीसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पूरी की है। उन्होंने वहां से बीसीए, एम.ए. अपराधशास्त्र और एम.पी.ए. रंगमंच की पढ़ाई की है। अभिनय के क्षेत्र में उनकी नींव डॉक्टर राकेश सोनी के मार्गदर्शन में तैयार हुई, जिन्होंने उन्हें थिएटर की बारीकियां सिखाईं।

फिल्मों में मिला खास किरदार

ज्ञानचंद की हाल ही में 12 जून को हीर सारा फिल्म रिलीज हुई है, जिसमें उन्होंने राजू मैकेनिक की भूमिका निभाई है। इस किरदार ने उन्हें दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता दिलाई है। वे बताते हैं कि उन्होंने इस फिल्म के लिए ऑनलाइन ऑडिशन दिया था। इसके अलावा, उन्होंने 'जनहित में जारी' और नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ 'कोस्टाओ' जैसी फिल्मों में भी अभिनय किया है। आने वाले समय में उनकी फिल्में 'नागजिला', 'उम्रकैद' और 'तुम्बाड 2' रिलीज होने के लिए तैयार हैं।

संघर्ष और सफलता

सागर से मुंबई तक का सफर उनके लिए आसान नहीं था। यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया, जहां उन्होंने 4 साल तक कड़ा संघर्ष किया। उनके गुरु डॉक्टर राकेश सोनी बताते हैं कि ज्ञानचंद आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हैं और सागर आकर थिएटर करते रहते हैं। उनकी यह मेहनत और रंगमंच का अनुभव ही है, जिसकी बदौलत वे फिल्मी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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