खाद्य संकट की आहट: एस जयशंकर की चेतावनी से दुनिया में मची हलचल, 5 करोड़ लोगों पर है बड़ा खतरा राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 2
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक खाद्य संकट की गंभीर चेतावनी दी है। युद्ध और जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में अनाज की आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे करोड़ों लोगों पर अकाल का साया मंडरा रहा है।

वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर गहराते संकट के बादल

दुनिया भर में भोजन की भारी कमी की चेतावनी ने नीति निर्माताओं की नींद उड़ा दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में न्यूयॉर्क की प्रतिष्ठित एशिया सोसाइटी के मंच से एक बेहद डरावनी तस्वीर पेश की है। उनके अनुसार, आने वाले कुछ ही महीनों के भीतर पूरी दुनिया एक विकराल खाद्य संकट का सामना करने वाली है। यह चेतावनी महज एक सामान्य चिंता नहीं है, बल्कि इसके पीछे तीन-चार बड़े भू-राजनीतिक और पर्यावरणीय कारण जिम्मेदार हैं।

संकट के मुख्य कारण और अल नीनो का प्रभाव

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था तीन बड़े झटकों से एक साथ जूझ रही है। सबसे पहले, यूक्रेन में लंबे समय से जारी संघर्ष ने अनाज के उत्पादन और निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। दूसरा, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारक मौसम से जुड़ा हुआ है, जहां मजबूत अल नीनो के प्रभाव ने दुनिया भर की खेती और पैदावार को असंतुलित कर दिया है। इन तीन संकटों ने न केवल अनाज की उपलब्धता को कम किया है, बल्कि उर्वरकों की आपूर्ति में भी भारी रुकावटें पैदा की हैं।

विकासशील देशों पर संकट की दोहरी मार

इसका सबसे घातक प्रभाव ग्लोबल साउथ के उन विकासशील देशों पर पड़ रहा है जो पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। एस जयशंकर की चेतावनी के अनुसार, करीब 5 करोड़ लोगों पर अकाल और भुखमरी का सीधा खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा, एक छिपा हुआ संकट भी सक्रिय है। जैसे ही दुनिया के किसी हिस्से में युद्ध या तनाव की स्थिति बनती है, निवेशक अपना पैसा ग्लोबल साउथ के बाजारों से बाहर निकाल लेते हैं। यह पूंजी सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर जाती है, जिससे गरीब देशों के सामने ऊर्जा, भोजन, उर्वरक और वित्त के मोर्चे पर एक साथ चौतरफा मुसीबत खड़ी हो गई है। भारत के घरेलू मोर्चे पर भी कमजोर मानसून और चावल की बढ़ती कीमतें चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। ऐसे में भारत की फूड डिप्लोमेसी आने वाले समय में दुनिया के लिए एक बड़ी राहत बनकर उभर सकती है, बशर्ते समय रहते उचित वैश्विक कदम उठाए जाएं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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