सड़कों पर रसूख का कहर: क्या अमीर परिवारों की बिगड़ैल औलादें कानून से ऊपर हैं? राष्ट्रीय राजनीति 5 घंटे पहले 2
हाल ही में भुवनेश्वर और कोच्चि में हुई सड़क दुर्घटनाओं ने रसूखदार परिवारों के बच्चों द्वारा कानून की अनदेखी और सड़क सुरक्षा के प्रति उनकी लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सड़कों पर बेलगाम रसूख

भुवनेश्वर में कार से राहगीरों को कुचलने का मामला हो या कोच्चि में मिनी कूपर कार की टक्कर से तीन छात्रों की दर्दनाक मौत, ये घटनाएं देश में कानून व्यवस्था और सड़क सुरक्षा की पोल खोल रही हैं। अक्सर देखा जाता है कि रसूखदार परिवारों के बच्चे पैसे और पहुंच के दम पर कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करते हैं। भुवनेश्वर वाले मामले में आरोपी पर पहले भी इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे हैं।

कानून की निष्पक्षता पर सवाल

कोच्चि की घटना में प्रशासन ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सवाल अभी भी वही है कि क्या रसूखदार परिवारों के बच्चों को कानून का कोई डर नहीं है। क्या उन्हें लगता है कि रसूख और पैसा होने के कारण वे हर बार अपराध करके आसानी से बच निकलेंगे? भारत में रोड रेज से जुड़े मामलों में अपराध की गंभीरता को देखते हुए अलग अलग कानूनी धाराएं लागू की जाती हैं।

कड़ी कार्रवाई की दरकार

यह बेहद जरूरी है कि इन मामलों में जांच की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष हो। जब दोष पूरी तरह से साबित हो जाए, तो कानून का डंडा हर किसी पर समान रूप से चलना चाहिए, चाहे वह व्यक्ति किसी भी रसूखदार परिवार से ही क्यों न ताल्लुक रखता हो। सड़क पर लापरवाही से जान गंवाने वाले मासूमों के प्रति जवाबदेही तय करना ही न्याय की पहली शर्त है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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