उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोक दल को तगड़ा झटका, प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने दिया इस्तीफा उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 3
यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राष्ट्रीय लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

पार्टी और पद से किनारा

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय लोक दल (RLD) को एक बड़ा सियासी झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने अपने पद से इस्तीफा देने के साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी नाता तोड़ लिया है। उन्होंने अपना औपचारिक इस्तीफा राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह को भेजा है। अपने इस कदम की जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी सार्वजनिक की है। रामाशीष राय ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय उन्होंने नैतिक और वैचारिक मतभेदों के चलते लिया है और उनका मानना है कि वर्तमान में देश का लोकतंत्र खतरे में है।

व्यवस्था परिवर्तन का सपना अब भी अधूरा

अपने त्यागपत्र में रामाशीष राय ने अपनी राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 1974-75 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रभावित होकर राजनीति में आए थे। उस दौर में महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गिरती स्थिति मुख्य मुद्दे थे। उन्होंने अफसोस जताते हुए लिखा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने व्यवस्था में बदलाव का जो सपना संजोया था, वह आज भी अधूरा दिखाई देता है।

धनबल और प्रभावशाली वर्गों का बोलबाला

रामाशीष राय ने वर्तमान राजनीतिक हालात पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि आज का लोकतंत्र धनबल और कुछ प्रभावशाली लोगों के चंगुल में फंसता जा रहा है। समाज को जाति, संप्रदाय और उपजातियों के आधार पर बांटने की कोशिशें तेज हुई हैं। उन्होंने कहा कि आज का किसान अपनी फसलों का सही दाम पाने के लिए जूझ रहा है और युवा पीढ़ी बेरोजगारी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। समाज में असंतोष बढ़ रहा है क्योंकि शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर निराशाजनक स्थिति है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महापुरुषों ने 'जाति तोड़ो, समाज जोड़ो' का संदेश दिया था, लेकिन आज सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोग मौजूद हैं जो नफरत और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दे रहे हैं।

लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर प्रहार

अपने इस्तीफे के अंतिम हिस्से में रामाशीष राय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने चुनावों में बढ़ते धनबल पर जो चिंता जताई थी, वह आज सच होती दिख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता की जगह परिवारवाद और आर्थिक ताकत ने ले ली है। रामाशीष राय ने लिखा कि संविधान और संवैधानिक संस्थाओं पर जिस तरह से लगातार प्रहार हो रहे हैं, उससे लोकतंत्र का अस्तित्व संकट में है। उन्होंने अपने त्यागपत्र का समापन करते हुए कहा कि 'व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश' के सिद्धांत का पालन करते हुए वे पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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