रीवा: कल्पना मिश्रा को न्याय दिलाने के लिए चल रहे धरने पर पत्थरबाजी, बुजुर्ग घायल मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 3
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में हुई जच्चा-बच्चा की मौत के बाद जारी प्रदर्शन हिंसक हो गया, जहां पथराव में एक बुजुर्ग चोटिल हो गए हैं। मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है और परिजनों ने इसे लापरवाही नहीं बल्कि हत्या बताया है।

सिरमौर चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान बवाल

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित संजय गांधी अस्पताल में हुई जच्चा-बच्चा की मौत का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। इस दुखद घटना के विरोध में मृतका कल्पना मिश्रा के पिता सिरमौर चौराहे पर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे, लेकिन शनिवार को यह प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़प और हंगामे में बदल गया। धरना स्थल पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ओवरब्रिज की दिशा से किसी अज्ञात व्यक्ति ने पत्थर फेंके। इस अचानक हुई पत्थरबाजी की चपेट में आकर अवध प्रसाद मिश्रा नामक एक बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। पत्थर सीधे उनके सिर पर लगा, जिससे वे लहूलुहान हो गए। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने जमकर हंगामा किया। लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि पत्थर फेंकने वाले उपद्रवी की तत्काल पहचान की जाए और उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस घटना ने पूरे धरना स्थल पर तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।

राजनीतिक सरगर्मी और नेताओं का जमावड़ा

जैसे-जैसे प्रदर्शन आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसमें राजनीतिक हस्तियों की सक्रियता भी बढ़ती जा रही है। शनिवार को धरने पर बैठे पीड़ित परिवार का समर्थन करने के लिए कई बड़े नेता पहुंचे। मऊगंज के पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना और सेमरिया के विधायक अभय मिश्रा धरना स्थल पर मौजूद रहे। स्थानीय स्तर पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब प्रदर्शन स्थल पर नेताओं के लिए अलग से पांडाल लगाए गए हैं, जो यह दर्शाता है कि अब यह मामला केवल पीड़ित परिवार तक सीमित न रहकर पूर्णतः राजनीतिक स्वरूप ले चुका है। कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने पीड़ित पिता के साथ सहानुभूति प्रकट करते हुए कुछ समय तक मौन धरना भी दिया। पीड़ित पिता का मुख्य संघर्ष अस्पताल प्रबंधन और लापरवाही के दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को लेकर है। उनका आरोप है कि प्रशासन इस मामले में ढिलाई बरत रहा है।

उपमुख्यमंत्री की मुलाकात और अधूरी उम्मीदें

इससे पहले, बीते शुक्रवार को मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी धरना स्थल का दौरा किया था। मंत्री के वहां पहुंचने से पीड़ित परिवार को उम्मीद थी कि अब उन्हें तुरंत इंसाफ मिलेगा। हालांकि, उपमुख्यमंत्री और पीड़ित परिवार के बीच करीब 30 मिनट तक लंबी बातचीत चली, लेकिन इसके बावजूद परिजन सरकारी आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए। वे अपनी मांगों पर अडिग हैं और दोषियों पर सीधी कार्रवाई चाहते हैं।

परिजनों का आरोप: यह हादसा नहीं, हत्या है

पीड़ित पिता ने अपनी बेटी कल्पना मिश्रा की मौत को किसी भी हाल में एक सामान्य चिकित्सा हादसा मानने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर सीधे तौर पर 'हत्या' का गंभीर आरोप लगाया है। उनका तर्क है कि मेडिकल लापरवाही की हदें पार हो चुकी हैं और जिम्मेदार डॉक्टरों व अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। पिता का कहना है कि जिन लोगों की जांच होनी चाहिए थी, वे आज भी अपनी कुर्सी पर बैठकर अस्पताल की व्यवस्थाओं को नियंत्रित कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि जब तक दोषियों पर नामजद एफआईआर दर्ज नहीं होती और निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। फिलहाल प्रशासन के लिए यह स्थिति चुनौती बनी हुई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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