रीवा का मशहूर राज विलास होटल: बघेली थाली के स्वाद में सिमटा विंध्य का असली जायका मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 5
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित राज विलास होटल अपनी पारंपरिक बघेली थाली के लिए पर्यटकों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां दालपूरी से लेकर रसाज तक के लजीज व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं।

विंध्य की परंपरा का अनूठा संगम

मध्य प्रदेश का विंध्य क्षेत्र और विशेष रूप से रीवा शहर अपनी गौरवशाली संस्कृति के साथ-साथ अपने अनूठे खानपान के लिए भी जाना जाता है। बदलते दौर में जब लोग आधुनिक व्यंजनों की तरफ भाग रहे हैं, रीवा का राज विलास होटल एक ऐसी जगह है जिसने बघेलखंड के पारंपरिक स्वाद को जीवित रखा है। यहां परोसी जाने वाली विशेष बघेली थाली आज पर्यटकों की पहली पसंद बनी हुई है, जो उन्हें विंध्य की मिट्टी की खुशबू और असली स्वाद से रूबरू कराती है।

पर्यटकों की पहली पसंद बना बघेली स्वाद

रीवा में जब भी कोई पर्यटक सफेद बाघों को देखने के लिए आता है, तो वह स्थानीय संस्कृति को करीब से समझने की इच्छा जरूर रखता है। इन पर्यटकों के लिए यह होटल एक अनिवार्य पड़ाव बन चुका है, जहां वे बघेली व्यंजनों का लुत्फ उठा सकते हैं। होटल की एचएचआर मैनेजर शिवाली सिंह के अनुसार, यहां आने वाले बाहरी मेहमानों में पारंपरिक भोजन को चखने के लिए जबरदस्त उत्साह देखा जाता है। यह होटल इस पूरे क्षेत्र का एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां इतने व्यवस्थित तरीके से प्रामाणिक बघेली जायका पेश किया जाता है, जो स्थानीय पहचान को मजबूती दे रहा है।

क्या-क्या मिलता है खास बघेली थाली में

इस विशेष बघेली थाली का मूल्य 650 रुपये निर्धारित किया गया है। थाली की खासियत यह है कि इसमें बघेलखंड के लगभग सभी पारंपरिक व्यंजन एक साथ परोसे जाते हैं। इस थाली में निम्नलिखित व्यंजन शामिल होते हैं:

  • दालपूरी: जो इस थाली का मुख्य हिस्सा है।
  • इंद्रहार और रसाज: ये व्यंजन यहां की पहचान हैं।
  • बघेली चिकन और बघेली बिरयानी: मांसाहारी शौकीनों के लिए विशेष व्यंजन।
  • रिकमच, चने का साग, बरा और मुंगौरा: जो भोजन का स्वाद दोगुना कर देते हैं।

पकवानों को बनाने का अनोखा तरीका

इन व्यंजनों को तैयार करने की विधि काफी पारंपरिक और मेहनत भरी है। इंद्रहार बनाने के लिए अरहर, चना और मूंग की दाल को पहले अच्छी तरह भिगोया जाता है, फिर इसे पीसकर पेस्ट तैयार किया जाता है। बाद में इसे जमाकर बर्फी के आकार में काटा जाता है। वहीं, रसाज की कढ़ी की तैयारी भी काफी दिलचस्प है, जिसमें बेसन में करायल और पानी का मिश्रण उपयोग किया जाता है। इसके बाद इसे जमाकर और काटकर तला जाता है और फिर कढ़ी में डाला जाता है।

बघेली दालपूरी और चिकन की खासियत

बघेली दालपूरी बनाने की प्रक्रिया में चने की दाल को पकाकर उसमें खास मसाले मिलाए जाते हैं और फिर आटे की लोई में भरकर इसे तला जाता है। वहीं दूसरी तरफ, बघेली चिकन बनाने का तरीका सामान्य चिकन से बिल्कुल अलग है। इसमें पिसे हुए मसालों के बजाय खड़े मसालों का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे एक अलग ही सुगंध और स्वाद देते हैं। इस तरह के पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से राज विलास होटल न केवल मेहमानों का पेट भर रहा है, बल्कि विंध्य के खानपान की इस समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम भी कर रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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