IPL क्रिकेटर शशांक और पूर्व DG के खिलाफ एक और पीड़ित आया सामने, प्रताड़ना से परेशान होकर लिख लिया था सुसाइड नोट मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 71
मध्य प्रदेश में पूर्व स्पेशल डीजी शैलेष सिंह और उनके बेटे आईपीएल क्रिकेटर शशांक सिंह के खिलाफ प्रताड़ना का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक कर्मचारी ने मारपीट और झूठे केस में फंसाने की धमकी का आरोप लगाया है।

मामले की गंभीरता

मध्य प्रदेश में पूर्व स्पेशल डीजी शैलेष सिंह और उनके बेटे आईपीएल क्रिकेटर शशांक सिंह के खिलाफ विवादों का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। रीवा और विदिशा से जुड़ा यह मामला अब और भी गहरा गया है जब एक और कर्मचारी ने उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित राजीव विश्वकर्मा ने दावा किया है कि नौकरी के दौरान न केवल उनके साथ मारपीट की गई, बल्कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां देकर प्रताड़ित भी किया गया। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कार्रवाई न होने से पीड़ित बेहद निराश है। गौरतलब है कि इससे पहले भी 29 अप्रैल को विपेंद्र सिंह तोमर की शिकायत पर इन दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

काम छोड़ने पर मारपीट और बदसलूकी का आरोप

विदिशा जिले के गंजबासौदा निवासी राजीव विश्वकर्मा ने बताया कि उन्होंने इस साल 30 अप्रैल को एक ऐप के माध्यम से शैलेष सिंह के घर हाउसकीपिंग का काम शुरू किया था। उनका कहना है कि नौकरी के महज एक दिन बाद यानी 1 मई को ही उनके साथ दुर्व्यवहार शुरू हो गया। राजीव के अनुसार, घर की एक सदस्य ने उनके साथ गाली-गलौज की और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। जब राजीव ने वहां से काम छोड़ने का निर्णय लिया, तो उन पर चोरी का इल्जाम मढ़ दिया गया। उनसे बैग की तलाशी लेने को कहा गया, जिसके लिए वे राजी भी हो गए, लेकिन स्थिति इसके बाद और बिगड़ गई। आरोप है कि शैलेष सिंह ने गुस्से में आकर उन्हें जमीन पर पटक दिया और उनके साथ मारपीट की।

सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल छीनने का दावा

पीड़ित राजीव ने अपनी शिकायत में यह स्पष्ट किया कि उन्होंने पूरी घटना की सच्चाई जानने के लिए सीसीटीवी फुटेज दिखाने की मांग की थी, लेकिन उनकी मांग को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। इतना ही नहीं, मारपीट के दौरान उनका मोबाइल फोन और बैग भी जबरन छीन लिया गया। राजीव का यह भी आरोप है कि परिवार की एक सदस्य ने मारपीट का वीडियो इस तरह से बनाया कि उसे बाद में गलत तरीके से चोरी और छेड़छाड़ के आरोपों को साबित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

बड़े पद का हवाला देकर दबाई गई आवाज

राजीव विश्वकर्मा ने आगे बताया कि उन्हें लगातार डराया-धमकाया गया। उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि उन्होंने नौकरी छोड़ने की कोशिश की या किसी को कुछ बताया, तो उन्हें चोरी, लूट या छेड़छाड़ जैसे गंभीर और झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेज दिया जाएगा। पीड़ित के अनुसार, उस वक्त वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने भी उनकी कोई मदद नहीं की और बड़े अधिकारी का रसूख दिखाकर उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर किया गया।

सुसाइड नोट और रात के अंधेरे में पलायन

इस प्रताड़ना और दबाव से तंग आकर राजीव इतने टूट चुके थे कि उन्होंने अपना सुसाइड नोट तक तैयार कर लिया था। किसी तरह अपनी जान बचाकर, 1 और 2 मई की रात करीब ढाई बजे वे उस घर से भागने में सफल रहे। उन्होंने बताया कि वहां से लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने के बाद वे न्यू मार्केट इलाके तक पहुंचे। राजीव का दावा है कि उन्होंने 5 मई को ही प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को लिखित शिकायत भेज दी थी, लेकिन दो महीने का लंबा समय बीत जाने के बाद भी अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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