दक्षिण कोरिया का बड़ा सैन्य शक्ति प्रदर्शन: हवा में रास्ता बदलने वाली स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण विश्व 5 घंटे पहले 2
दक्षिण कोरिया ने पहली बार अपने देश में विकसित हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह मिसाइल आवाज की गति से पांच गुना तेज उड़ने और हवा में रास्ता बदलने में सक्षम है।

कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य शक्ति प्रदर्शन की होड़ एक नए स्तर पर पहुंच गई है। उत्तर कोरिया द्वारा हाल ही में किए गए मिसाइल परीक्षण के ठीक बाद अब दक्षिण कोरिया ने भी अपनी नई और घातक मिसाइल ताकत का प्रदर्शन किया है। दक्षिण कोरिया ने पहली बार पूरी तरह से अपने देश में विकसित की गई हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण गुरुवार, 8 अक्टूबर को आयोजित किया गया था, जिसे क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को बनाए रखने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हाइपरसोनिक मिसाइल की अद्भुत रफ्तार और तकनीक

इस नए हथियार की सबसे बड़ी और खास बात इसकी बेहद तेज रफ्तार और उड़ान के दौरान लगातार अपना रास्ता बदलने की अनूठी क्षमता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपरसोनिक हथियार हवा में आवाज की गति से कम से कम पांच गुना अधिक तेजी से उड़ान भर सकते हैं। इतनी अत्यधिक गति होने के कारण दुनिया के सबसे अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए भी इन्हें ट्रैक करना और बीच रास्ते में नष्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।

दक्षिण कोरियाई रक्षा अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस परीक्षण के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण चरण सफलतापूर्वक पूरे किए गए:

  • सबसे पहले एक शक्तिशाली बूस्टर रॉकेट इस हथियार को हवा में एक निश्चित और तय ऊंचाई तक लेकर गया।
  • तय ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह घातक हथियार मुख्य बूस्टर रॉकेट से पूरी तरह अलग हो गया।
  • रॉकेट से अलग होने के बाद इसने नीचे की ओर तेजी से बढ़ना शुरू किया।
  • इस दौरान हथियार ने हवा में ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं तेजी से अपना रास्ता बदला।
  • अंततः इस स्वदेशी हथियार ने बेहद सटीकता के साथ अपने पूर्व-निर्धारित लक्ष्य पर निशाना साधा।

सैन्य तैयारियों को मिलेगी नई ताकत

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग स्वयं इस महत्वपूर्ण सैन्य परीक्षण के गवाह बने और उन्होंने इसे स्वयं देखा। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने देश के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह देश की पारंपरिक रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत तथा सुदृढ़ करने की दिशा में एक बहुत ही अहम मील का पत्थर है। हालांकि, रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अत्याधुनिक हथियार अभी पूरी तरह से विकास के शुरुआती और परीक्षण के चरणों में है।

यद्यपि दक्षिण कोरियाई प्रशासन ने इसे सीधे तौर पर उत्तर कोरिया के परीक्षण के खिलाफ की गई कोई तात्कालिक जवाबी कार्रवाई नहीं बताया है, लेकिन वैश्विक राजनीति और सैन्य विश्लेषक इसे उत्तर कोरिया के आक्रामक रुख के सीधे जवाब के रूप में देख रहे हैं। दक्षिण कोरिया का दावा है कि जब यह हथियार पूरी तरह से विकसित होकर सेना के बेड़े में शामिल हो जाएगा, तब इसकी मदद से कोरियाई प्रायद्वीप में स्थित किसी भी दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों और संवेदनशील सैन्य अड्डों को आसानी से निशाना बनाया जा सकेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस प्रणाली को पूरी तरह से युद्ध के मैदान में तैनात करने और सेना में शामिल करने में अभी थोड़ा समय लग सकता है।

उत्तर कोरिया के परीक्षण के बाद बढ़ा तनाव

यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही दिन पहले यानी 3 अक्टूबर को उत्तर कोरिया ने अपनी एक हाइपरसोनिक इंटरमीडिएट-रेंज मिसाइल का परीक्षण करने का बड़ा दावा किया था। उत्तर कोरियाई प्रशासन के आधिकारिक बयानों के मुताबिक, उनकी इस मिसाइल ने करीब 1,000 किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तय की थी।

हालांकि, उत्तर कोरिया के इस दावे पर पड़ोसी देशों ने अलग-अलग आंकड़े प्रस्तुत किए थे:

  • दक्षिण कोरिया के सैन्य आकलन के अनुसार, उत्तर कोरिया की इस मिसाइल ने 700 किलोमीटर से थोड़ी अधिक दूरी तय की थी।
  • दूसरी ओर, जापान के रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस मिसाइल ने हवा में लगभग 680 किलोमीटर तक का सफर तय किया था।
  • जापान के अनुसार, यह मिसाइल जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र से बाहर जाकर समुद्र में सुरक्षित रूप से गिरी थी।

किम जोंग उन की बहन का तीखा बयान

उत्तर कोरिया के इस मिसाइल परीक्षण की दूरी और सटीक क्षमता को लेकर दक्षिण कोरिया और अमेरिका के रक्षा विभागों द्वारा लगाए गए अनुमानों में काफी अंतर देखा गया था। इस अंतर पर तंज कसते हुए उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की शक्तिशाली बहन किम यो जोंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

किम यो जोंग ने दोनों देशों के तकनीकी आकलनों पर सीधे तौर पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने अपने एक आधिकारिक बयान में कहा था कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे देश इस प्रकार की अत्याधुनिक और तीव्र गति वाली मिसाइलों को ठीक से ट्रैक करने की तकनीकी क्षमता नहीं रखते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि इन मिसाइलों को रोकना किसी भी वर्तमान एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बिल्कुल भी आसान काम नहीं है। ऐसे में, दक्षिण कोरिया द्वारा किया गया यह नया परीक्षण उत्तर कोरिया को यह बताने का प्रयास है कि दक्षिण कोरिया भी तकनीक और रक्षा क्षेत्र में किसी से पीछे नहीं है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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