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4 घंटे पहले
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विचारों
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के मंच पर एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब एक साथ आमने-सामने आए, तो उनकी गर्मजोशी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वैश्विक स्तर पर जारी मौजूदा तनाव और बदलती परिस्थितियों के बीच इन तीनों बड़े देशों के शीर्ष नेताओं की यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जब मुस्कुराते हुए मिले तीनों देशों के नेता
बिश्केक में आयोजित इस शिखर सम्मेलन के दौरान जैसे ही यह तीनों दिग्गज नेता एक छत के नीचे आए, वहां का माहौल पूरी तरह से दोस्ताना नजर आया। एक तरफ से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आगे बढ़ रहे थे, वहीं दूसरी तरफ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खड़े थे। तीनों नेता जब एक-दूसरे के करीब पहुंचे, तो उनके चेहरों पर पुरानी दोस्ती वाली गहरी मुस्कान थी।
इस दौरान पीएम मोदी ने बेहद गर्मजोशी के साथ पुतिन और जिनपिंग का हाथ थाम लिया। यह खुशनुमा पल सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है और वैश्विक मीडिया में भी इसकी खूब चर्चा की जा रही है। तीनों नेताओं के एक साथ खड़े होने और आपस में हाथ मिलाने के इस खास अंदाज को देखकर विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह तिकड़ी दुनिया को यह कड़ा संदेश दे रही है कि भविष्य का नेतृत्व करने वाला ध्रुव अब यही देश हैं। यह एक ऐसी ताकतवर तिकड़ी है, जो महाशक्ति अमेरिका के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच देती है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले की यह महत्वपूर्ण मुलाकात
भारत, चीन और रूस के शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार यह दूसरी ऐसी मुलाकात है, जिसने वैश्विक स्तर पर हलचल मचाई है। इससे पहले पिछले साल शंघाई में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान भी इन नेताओं के बीच इसी तरह की मुलाकात हुई थी, जिसकी तस्वीरें इंटरनेट पर काफी वायरल हुई थीं।
अब बिश्केक में हुई इस मुलाकात के बाद, ये तीनों नेता जल्द ही आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में एक बार फिर आमने-सामने होने वाले हैं। सबसे खास बात यह है कि इस बार ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी भारत के हाथों में है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तो आ ही रहे हैं, साथ ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी भारत पहुंचने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का वैश्विक महत्व
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) वैश्विक राजनीति और दुनिया की आर्थिक व्यवस्था में एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस संगठन की ताकत और प्रभाव को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- सदस्य देशों की ताकत: इस संगठन में वर्तमान समय में कुल 10 सदस्य देश शामिल हैं। इसमें भारत, रूस, चीन के साथ-साथ पाकिस्तान, ईरान और किर्गिस्तान जैसी अन्य क्षेत्रीय शक्तियां भी अपनी भागीदारी निभा रही हैं।
- विश्व की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: यह मजबूत संगठन पूरी दुनिया की कुल जीडीपी (GDP) के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जो इसे आर्थिक रूप से एक महाशक्तिशाली मंच बनाता है।
- दीर्घकालिक आपसी सहयोग: इस संगठन से जुड़े सभी देश अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों के दायरे में रहकर अपने आपसी हितों को मजबूत कर रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य आपस में भाईचारे, गहरी दोस्ती और दीर्घकालिक सहयोग के संबंधों को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
बिश्केक की इस मुलाकात ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भले ही वैश्विक पटल पर कितनी भी उथल-पुथल क्यों न मची हो, लेकिन भारत, रूस और चीन की यह तिकड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी मजबूत और प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराने से कभी पीछे नहीं हटती।
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