समुद्र में उतरा उत्तर कोरिया का 'दैत्य', 5000 टन वजनी जंगी जहाज से अमेरिका की बढ़ी चिंता विश्व 2 महीने पहले 80
किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया की नौसेना में 5000 टन वजन वाला शक्तिशाली डिस्ट्रॉयर 'चोए ह्योन' शामिल किया है। यह परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस है, जिसने अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

समुद्र में नई ताकत का प्रदर्शन

उत्तर कोरिया ने अपने नौसैनिक बेड़े में एक अत्यंत शक्तिशाली युद्धपोत शामिल किया है, जो आने वाले समय में अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। किम जोंग उन ने हाल ही में 5000 टन वजनी डिस्ट्रॉयर 'चोए ह्योन' को नौसेना में तैनात करने की घोषणा की है। पश्चिमी बंदरगाह नाम्पो में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान किम जोंग उन ने खुद इस युद्धपोत का निरीक्षण किया और इसे देश की समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम बताया।

परमाणु हथियारों से लैस नौसेना

किम जोंग उन के अनुसार, उत्तर कोरिया की नौसेना अब केवल रक्षात्मक बल नहीं रह गई है, बल्कि यह परमाणु हथियारों से लैस एक पूर्ण सामरिक शक्ति बन चुकी है। आधिकारिक मीडिया KCNA की रिपोर्ट के मुताबिक, यह युद्धपोत निम्नलिखित हथियारों से लैस है:

  • परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें।
  • आधुनिक एंटी-एयरक्राफ्ट और एंटी-शिप हथियार प्रणाली।

किम जोंग उन ने स्पष्ट किया कि उनकी नौसेना के परमाणु हथियारों से लैस होने की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी है। उन्होंने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य आधुनिकीकरण पर निशाना साधते हुए चेतावनी दी कि ये कदम क्षेत्र को परमाणु युद्ध के मुहाने पर धकेल रहे हैं।

भविष्य की योजनाएं और रूसी मदद

उत्तर कोरिया की महत्वाकांक्षाएं यहीं नहीं रुकने वाली हैं। 'चोए ह्योन' के बाद जल्द ही 'कांग कोन' नामक डिस्ट्रॉयर को भी तैनात किया जाएगा। किम जोंग उन का लक्ष्य हर साल दो ऐसे आधुनिक युद्धपोत बनाना है, जो क्षमता में 'चोए ह्योन' से भी बेहतर हों। इसके अलावा, भविष्य में 10,000 टन के रणनीतिक युद्धपोत भी विकसित करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस उन्नत नौसैनिक क्षमता को हासिल करने में उत्तर कोरिया को रूस से तकनीकी सहायता मिल रही है, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और मजबूत हुआ है।

परमाणु हथियारों का जखीरा

SIPRI की रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय दावों के अनुसार, उत्तर कोरिया के पास वर्तमान में लगभग 50-60 परमाणु हथियार मौजूद हैं। देश का न्योंगब्योंग न्यूक्लियर सेंटर उच्च संवर्धन वाला यूरेनियम तैयार कर रहा है। इसके अतिरिक्त, ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी ICBM मिसाइलें, जिनकी मारक क्षमता 15000 किलोमीटर से अधिक है, सीधे वॉशिंगटन को निशाने पर लेने में सक्षम हैं। 2019 में अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता विफल होने के बाद से किम जोंग उन ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों की गति को काफी तेज कर दिया है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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