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3 घंटे पहले
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प्रकृति में अक्सर ऐसी घटनाएं घटती हैं जो इंसानी दिमाग को चकित कर देती हैं। कुछ ऐसा ही अनोखा और हैरान करने वाला मामला कनाडा से सामने आया है, जहां एक विशाल झील के ऊपर पेड़ों से लदा एक पूरा 'जंगल' तैरता हुआ दिखाई दिया। पानी के बीचों-बीच तैरते इस विशाल भू-भाग को जिसने भी देखा, वह दंग रह गया। लेकिन इस कहानी में असली मोड़ तब आया जब कुछ ही हफ्तों बाद यह विशालकाय तैरता हुआ द्वीप रहस्यमयी परिस्थितियों में अचानक गायब हो गया। इस अजीबोगरीब घटना ने वैज्ञानिकों, स्थानीय निवासियों और अधिकारियों को गहरी उलझन में डाल दिया है।
रहस्यमयी तैरते टापू की पहली झलक
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में स्थित विलिस्टन रिजर्वायर के शांत पानी में यह अविश्वसनीय नजारा देखने को मिला। सबसे पहले इस तैरते हुए टापू को एक स्थानीय नाविक ने देखा था, जिसने इसकी कुछ तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कर लीं। जब ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं, तो इंटरनेट पर सनसनी फैल गई। हजारों लोगों ने इसे देखा और इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे।
शुरुआत में, लोगों को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। यहां तक कि सरकारी अधिकारियों ने भी इस तस्वीर की प्रामाणिकता पर संदेह जताया। कई लोगों का मानना था कि यह इंटरनेट पर वायरल होने वाली कोई नकली या AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा तैयार की गई तस्वीर है। लेकिन जल्द ही विज्ञान और तकनीक की मदद से इस रहस्य से पर्दा उठा और इसकी सत्यता साबित हो गई।
सैटेलाइट तस्वीरों ने की पुष्टि और मापा आकार
इस तैरते हुए जंगल की सच्चाई का पता लगाने के लिए जब सैटेलाइट के आंकड़ों और तस्वीरों की जांच की गई, तो सच सबके सामने आ गया। स्थानीय बिजली कंपनी बीसी हाइड्रो ने इस बात की पुष्टि की कि यह कोई काल्पनिक दृश्य नहीं बल्कि एक वास्तविक घटना थी। सैटेलाइट द्वारा 20-21 जुलाई को ली गई तस्वीरों में इस तैरते हुए भू-भाग को साफ तौर पर देखा जा सकता था।
जब विशेषज्ञों ने इस अनोखे द्वीप के आकार को मापा, तो वे हैरान रह गए। यह तैरता हुआ ढांचा लगभग 70 मीटर चौड़ा और 140 मीटर लंबा था। कुल मिलाकर इसका क्षेत्रफल लगभग 9,800 वर्ग मीटर के करीब था, जो आकार में लगभग दो NFL फुटबॉल मैदानों के बराबर बैठता है। यह अनोखी आकृति फिनले बे के पश्चिम की तरफ, डब्ल्यू.ए.सी. बेनेट डैम से करीब 60 मील दूर रिजर्वायर के मुख्य और खुले पानी वाले हिस्से में दर्ज की गई थी। इतने विशाल आकार के जंगल का पानी पर तैरना अपने आप में एक अद्भुत और दुर्लभ प्राकृतिक घटना थी।
अचानक गायब हुआ 'तैरता जंगल'
इस खोज की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि इस घटना ने एक नया और गहरा मोड़ ले लिया। जब विशेषज्ञ इस तैरते द्वीप पर शोध करने और इसके बारे में और जानकारी जुटाने की तैयारी कर रहे थे, तभी यह अचानक कहीं गायब हो गया।
5 अगस्त को जब क्षेत्र की नई सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया गया, तो वैज्ञानिकों के होश उड़ गए। वह विशालकाय पेड़ों से भरा टापू, जो कुछ दिन पहले तक शान से पानी पर तैर रहा था, अब वहां से पूरी तरह नदारद था। झील की सतह बिल्कुल साफ थी और वहां उस तैरते जंगल का कोई भी नामोनिशान नहीं बचा था। न तो पानी पर कोई मलबा दिखाई दे रहा था और न ही इसके किसी अन्य स्थान पर होने का स्पष्ट संकेत मिल रहा था।
आखिर कैसे बना होगा यह अनोखा द्वीप?
इस तैरते हुए द्वीप के निर्माण को लेकर बीसी हाइड्रो के अधिकारियों ने एक बेहद दिलचस्प और व्यावहारिक वैज्ञानिक थ्योरी साझा की है। उनका मानना है कि इसके पीछे प्रकृति की एक धीमी और क्रमिक प्रक्रिया काम कर रही थी।
अधिकारियों के अनुसार, विलिस्टन रिजर्वायर के किनारों पर कई वर्षों से सूखी लकड़ियां, झाड़ियां और अन्य जैविक मलबा धीरे-धीरे जमा होता रहा होगा। समय के साथ यह सारा जैविक कचरा सड़कर आपस में जुड़ गया होगा और उसने एक ठोस परत का रूप ले लिया होगा। बाद में, इसी सड़े हुए मलबे के ऊपर विभिन्न प्रकार के पौधों और पेड़ों के बीज गिरे होंगे, जिन्होंने वहां अपनी जड़ें जमा लीं। जड़ों के आपस में गुंथ जाने के कारण इस पूरे ढांचे को एक मजबूत आधार मिल गया। अंततः, जब रिजर्वायर में जलस्तर बढ़ा होगा, तो यह विशाल भू-भाग किनारे की जमीन से टूटकर अलग हो गया होगा और पानी के बहाव के साथ खुले जलाशय में बह निकला होगा।
लापता टापू को लेकर उठ रहे हैं कई सवाल
हालांकि इसके बनने की प्रक्रिया का अनुमान तो लगा लिया गया है, लेकिन इसके अचानक गायब हो जाने का रहस्य अभी भी पूरी तरह से नहीं सुलझ पाया है। बीसी हाइड्रो के विशेषज्ञों का कहना है कि यह जरूरी नहीं कि यह विशालकाय ढांचा पानी में डूब ही गया हो। इसके गायब होने को लेकर कई तरह की संभावनाएं जताई जा रही हैं:
- यह तैरता हुआ द्वीप पानी की लहरों और हवा के प्रभाव से किसी ऐसे शांत या सुरक्षित तटीय हिस्से की तरफ बहकर चला गया हो, जो उपलब्ध सैटेलाइट कैमरों की सीधी नजर में नहीं आ पा रहा है।
- जलाशय के अशांत पानी और तेज हवाओं के थपेड़ों के कारण यह विशाल ढांचा आपस में टूटकर बिखर गया हो और इसके छोटे-छोटे टुकड़े पानी में बह गए हों।
- यह भी संभव है कि अत्यधिक पानी सोखने के कारण इसका वजन बढ़ गया हो और यह धीरे-धीरे पानी के नीचे समा गया हो।
फिलहाल, बीसी हाइड्रो के अधिकारी इस पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रख रहे हैं और नई सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन कर रहे हैं। कनाडा की इस विशाल झील में उठा यह रहस्यमयी 'चलता-फिरता जंगल' आज भी वैज्ञानिकों और आम लोगों के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। लोग अब भी यही सोच रहे हैं कि आखिर वह दो फुटबॉल मैदानों जितना विशाल टापू रातों-रात कहां ओझल हो गया।
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