अगला साल साबित हो सकता है विनाशकारी, दुनिया पर मंडरा रहा है इतिहास के सबसे शक्तिशाली एल नीनो का खतरा विश्व 2 घंटे पहले 6
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में तेजी से पनप रहा एल नीनो आने वाले महीनों में भीषण तबाही का कारण बन सकता है, जिससे सूखा, बाढ़ और जंगल की आग जैसी आपदाएं बढ़ सकती हैं।

दुनिया पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा

दुनिया इस समय एक ऐसे दौर की दहलीज पर खड़ी है जहां प्रकृति का एक बड़ा बदलाव मानव जीवन पर भारी पड़ सकता है। वैज्ञानिकों की पैनी नजर इस वक्त प्रशांत महासागर पर टिकी है। यहां तेजी से सक्रिय और मजबूत होता एल नीनो आने वाले समय में इतिहास के सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी रूप में सामने आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र से लेकर विश्व के प्रमुख मौसम वैज्ञानिकों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है कि इस घटना का असर केवल वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। इसके परिणाम स्वरूप दुनिया के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति, विनाशकारी बाढ़, जंगलों में फैलने वाली आग, भीषण गर्मी और असामान्य चक्रवातों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

आखिर क्या है एल नीनो और यह क्यों खतरनाक है?

एल नीनो मुख्य रूप से प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान और वहां चलने वाली हवाओं में होने वाले बदलावों से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है। हालांकि, इस बार वैज्ञानिकों की चिंता इसके होने से नहीं, बल्कि इसकी तीव्रता और असामान्य रूप से जल्दी सक्रिय होने से है। आंकड़ों पर गौर करें तो अगस्त के महीने में इसका सापेक्ष तापमान सूचकांक सामान्य से करीब 2.3 डिग्री सेल्सियस ऊपर दर्ज किया गया है।

आमतौर पर एल नीनो का चरम स्तर नवंबर से जनवरी के बीच देखने को मिलता है, लेकिन इस बार यह समय से पहले ही असाधारण रूप से ताकतवर दिखाई दे रहा है। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन ने वैज्ञानिकों के लिए चुनौती को और बढ़ा दिया है। समुद्र पहले से ही काफी गर्म हो चुके हैं, इसलिए केवल सतह के तापमान से ही इसका सटीक आकलन करना कठिन हो गया है। अब विशेषज्ञ एक ऐसे उन्नत सापेक्ष सूचकांक का उपयोग कर रहे हैं जो यह समझने में मदद करता है कि गर्म होती दुनिया के बीच यह मौजूदा तापमान वृद्धि कितनी असामान्य और खतरनाक है।

दुनिया के विभिन्न हिस्सों में दिखने लगा है असर

इस संभावित रिकॉर्डतोड़ एल नीनो के शुरुआती संकेत दुनिया के अलग-अलग कोनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। प्रशांत महासागर के तटीय देशों में इसका प्रभाव सबसे अधिक महसूस किया जा रहा है। इंडोनेशिया से बड़े पैमाने पर जंगलों में लगी आग की खबरें सामने आ रही हैं। वैज्ञानिक इन घटनाओं को लगातार बढ़ती गर्मी और शुष्क मौसम की परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं।

इसके अलावा, समुद्री तूफानों और चक्रवातों के पैटर्न में भी हैरान करने वाले बदलाव देखे जा रहे हैं। प्रशांत महासागर में जापान के पास से लेकर हवाई तक के क्षेत्र में एक साथ कई उष्णकटिबंधीय चक्रवात सक्रिय देखे गए हैं। आमतौर पर एक साथ इतनी व्यापक चक्रवाती सक्रियता को असामान्य माना जाता है। एल नीनो समुद्र के गर्म पानी को मध्य और पूर्वी प्रशांत की तरफ धकेलता है, जिससे संबंधित क्षेत्रों में समुद्री तूफानों की तीव्रता में भारी बढ़ोतरी हो जाती है। ऑस्ट्रेलिया के हालात भी चिंताजनक बने हुए हैं। वहां के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है और मौसम अत्यधिक शुष्क होता जा रहा है। उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के कुछ क्षेत्रों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है, जो इस समय के लिए काफी अधिक है।

2027 में टूट सकते हैं गर्मी के सभी रिकॉर्ड

वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि एल नीनो का प्रभाव जलवायु परिवर्तन के असर के साथ मिलकर एक घातक संयोजन बना रहा है। पहले से गर्म होती जा रही दुनिया में एक अत्यंत शक्तिशाली एल नीनो वैश्विक तापमान को और खतरनाक स्तर तक ऊपर धकेल सकता है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इसका असर वर्ष 2027 में वैश्विक तापमान के नए और भयावह रिकॉर्ड के रूप में सामने आ सकता है।

एल नीनो के कारण पूरी दुनिया में बारिश के पैटर्न में भारी उथल-पुथल हो सकती है। कहीं सामान्य से बहुत कम बारिश होने के कारण सूखे का संकट गहरा सकता है, तो वहीं कुछ इलाकों में इतनी अत्यधिक बारिश हो सकती है कि वह बाढ़ का विकराल रूप ले ले। इसके अलावा भीषण गर्म हवाएं, जंगलों में लगने वाली बेकाबू आग और समुद्री तूफानों की प्रचंडता में भी इजाफा होने की पूरी संभावना है।

भारत के लिए क्या हैं चुनौतियां

भारत जैसे देश, जो अपनी कृषि और जल जरूरतों के लिए मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर हैं, उनके लिए एल नीनो की गतिविधियां बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील होती हैं। प्रशांत महासागर में होने वाली हलचल हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण एशिया के तापमान और बारिश के मिजाज को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। वर्तमान में दुनिया एक ऐसी मौसमी घटना का सामना कर रही है जो असाधारण रूप से जल्दी मजबूत हुई है और अभी अपने चरम बिंदु तक पहुंचना शेष है। यदि आने वाले महीनों में इसकी तीव्रता अनुमानों के अनुरूप बनी रहती है, तो 2027 दुनिया के लिए केवल एक नया साल नहीं होगा, बल्कि यह मौसम के लिहाज से नए और भयावह रिकॉर्ड का साल साबित हो सकता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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