मानव इतिहास में अभूतपूर्व काम, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने पीएम मोदी की कार्यक्षमता का लोहा माना विश्व 2 घंटे पहले 2
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा नीति की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि मानव इतिहास में किसी भी नेता ने इतने बड़े स्तर पर लोगों तक बिजली और ईंधन नहीं पहुंचाया जितना भारत में हुआ है। वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद भारत की ओर से अपनाई गई रणनीतियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के नेतृत्व की नई पहचान बनाई है।

मानव इतिहास में एक नया कीर्तिमान

आज की दुनिया जब भीषण ऊर्जा संकट से जूझ रही है और कई देश ईंधन की किल्लत और कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से परेशान हैं, ऐसे समय में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुले मंच से प्रशंसा की है। एंथनी अल्बनीज का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से भारत में ऊर्जा और बिजली की व्यवस्था को घर-घर तक पहुंचाया है, वह पूरे मानव इतिहास में अभूतपूर्व है। यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि जब दुनिया के कई बड़े देश आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण घुटने टेक रहे हैं, तब भारत का अडिग रहना पूरी दुनिया को हैरान कर रहा है।

एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में दी गई प्रतिक्रिया

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने यह बातें एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान कहीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत जैसे विशाल, विविधतापूर्ण और घनी आबादी वाले देश में हर व्यक्ति तक बिजली और ऊर्जा पहुंचाना एक असाधारण उपलब्धि है। अल्बनीज के अनुसार, उन्होंने अपने करियर और राजनीतिक जीवन में देखा है कि ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है, लेकिन पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत ने इसे बखूबी संभाला है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मानव सभ्यता के इतिहास में, किसी भी युग या किसी भी देश में इतने व्यापक पैमाने पर ऊर्जा संसाधनों का वितरण नहीं हुआ है, जितना भारत ने पिछले कुछ वर्षों में हासिल किया है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गहराता रणनीतिक विश्वास

इस अवसर पर अल्बनीज ने न केवल प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक और रणनीतिक रिश्तों पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली और कैनबरा के बीच का भरोसा अब नई ऊंचाइयों पर है। यह साझेदारी आने वाले दशकों तक दोनों राष्ट्रों की विकास यात्रा को दिशा देगी। प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अल्बनीज का यह सम्मान उनके व्यक्तिगत तालमेल और दोनों देशों के बीच हुए मजबूत समझौतों का परिणाम है, जो अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक स्थिरता प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में उभरे हैं।

वैश्विक ऊर्जा संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभाव

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें तो मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को संकट में डाल दिया है। इस संकट का केंद्र 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए जीवनरेखा समान है, जहां से दुनिया का लगभग एक-चौथाई कच्चा तेल गुजरता है। युद्ध और भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण इस रास्ते से होने वाली आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप तेल के टैंकर समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है, जिससे यूरोप से लेकर एशिया तक के देशों में हाहाकार मचा है।

पड़ोसी देशों की दयनीय स्थिति और भारत का अपवाद

इस वैश्विक ऊर्जा संकट का सबसे बुरा प्रभाव भारत के पड़ोसी देशों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में ईंधन की भारी किल्लत है, जिसके कारण वहां की अर्थव्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। पाकिस्तान में बिजली की लगातार कटौती और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने आम जनता का जीना दूभर कर दिया है। इसी तरह, बांग्लादेश में गैस और ईंधन की कमी से औद्योगिक उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है, जिससे वहां की निर्यात क्षमता भी कमजोर हुई है। इन सबके बीच, भारत का प्रदर्शन चौंकाने वाला रहा है। भारत में न तो पेट्रोल पंप खाली हुए और न ही ईंधन की कीमतों में कोई ऐसी अनियंत्रित वृद्धि देखी गई जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ जाए।

भारत की सफल ऊर्जा कूटनीति और मास्टरस्ट्रोक

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक संकट के दौरान भारत का सुरक्षित रहना उसकी दूरदर्शी रणनीति को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में खुद इस बात का उल्लेख किया था कि भारत ने किस प्रकार अपनी आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाकर खुद को सुरक्षित किया है। पहले भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए केवल 27 देशों पर निर्भर था, लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों को भांपते हुए भारत ने अपने नेटवर्क को विस्तार दिया है। आज भारत 41 अलग-अलग देशों से ऊर्जा प्राप्त कर रहा है। यह रणनीति भारत का एक बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' साबित हुई है, क्योंकि किसी एक क्षेत्र में तनाव होने पर भी भारत की आपूर्ति बाधित नहीं होती है।

140 करोड़ नागरिकों के प्रति प्रतिबद्धता

भारत सरकार का रुख स्पष्ट है: अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाहे कितनी भी अस्थिरता क्यों न हो, सरकार की पहली प्राथमिकता अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस बात पर जोर दिया है कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति के तहत उन्हीं देशों से ईंधन खरीदेगा जो भारत के हितों और शर्तों के अनुकूल होंगे। किसी भी बाहरी दबाव या अंतरराष्ट्रीय राजनीति की परवाह किए बिना भारत ने सस्ती दर पर तेल खरीदकर अपनी जनता को महंगाई की मार से बचाया है। यह भारत की आत्मनिर्भरता और मजबूत नेतृत्व की जीत है।

साझेदारी का नया सुनहरा दौर

ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच का संबंध अब ऊर्जा और तकनीक के नए युग में प्रवेश कर चुका है। ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक गैस, कोयला और यूरेनियम का एक प्रमुख निर्यातक है, जबकि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है जिसे निरंतर सस्ती ऊर्जा की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री अल्बनीज का यह मानना कि पीएम मोदी ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, भविष्य की बड़ी साझेदारी का मार्ग प्रशस्त करता है। भविष्य में ग्रीन एनर्जी, नवीकरणीय ऊर्जा और क्रिटिकल मिनिरल्स की सप्लाई चेन में भारत और ऑस्ट्रेलिया की भागीदारी एक वैश्विक उदाहरण बनने जा रही है।

निष्कर्ष: दुनिया मान रही है भारत का लोहा

अंत में, यह स्पष्ट है कि ऊर्जा संकट के इस दौर में भारत का प्रदर्शन उसकी बढ़ती वैश्विक शक्ति का प्रतीक है। जब विकसित देश और अन्य अर्थव्यवस्थाएं महंगाई और ईंधन की किल्लत के सामने बेबस दिख रही हैं, तब भारत का डटकर खड़ा रहना यह साबित करता है कि सही नेतृत्व और रणनीतिक स्पष्टता के साथ कठिन समय को भी अवसर में बदला जा सकता है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री का प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करना यह दर्शाता है कि भारत की विकास गाथा और उसकी कूटनीतिक सोच अब वैश्विक स्तर पर एक मानक के रूप में देखी जा रही है। भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि उसकी विकास यात्रा किसी भी वैश्विक व्यवधान से रुकने वाली नहीं है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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