हिंद महासागर के ऊपर आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा, पृथ्वी की ओर बढ़ रहा छोटा एस्टेरॉयड विश्व एक घंटा पहले 5
अंतरिक्ष से एक छोटा एस्टेरॉयड तेजी से पृथ्वी के वायुमंडल की ओर बढ़ रहा है जो आज रात ऑस्ट्रेलिया के ऊपर एक चमकदार उल्कापिंड के रूप में नजर आएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे किसी खतरे की संभावना नहीं है और यह वातावरण में प्रवेश करते ही जलकर नष्ट हो जाएगा।

आसमान में होने वाली है एक अनोखी खगोलीय घटना

पृथ्वी के वायुमंडल में आज एक बेहद रोमांचक खगोलीय घटना दर्ज होने वाली है। अंतरिक्ष की गहराइयों से एक छोटा एस्टेरॉयड बहुत ही तीव्र गति से पृथ्वी की ओर अग्रसर है। कुछ ही घंटों के भीतर यह खगोलीय पिंड ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के समीप पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाएगा। इस घटना को लेकर खगोल विज्ञान में खासी दिलचस्पी देखी जा रही है।

माउंट लेमन ऑब्जर्वेटरी ने की पहचान

अमेरिका स्थित माउंट लेमन ऑब्जर्वेटरी के अत्याधुनिक टेलिस्कोप के जरिए इस छोटे एस्टेरॉयड की हलचल को दर्ज किया गया है। वैज्ञानिकों ने इसे पृथ्वी की ओर सीधा आते हुए ट्रैक किया है। इस एस्टेरॉयड का नाम सीईआरएनक्यू52 रखा गया है। इसके आकार की बात करें तो यह काफी छोटा है, जिसकी लंबाई 0.8 मीटर यानी लगभग 3 फीट से भी कम बताई गई है।

क्या पृथ्वी को कोई खतरा है

इस खगोलीय घटना को लेकर आम लोगों में किसी भी तरह की घबराहट की आवश्यकता नहीं है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह एक नन्हा पिंड है, जो धरती से टकराने के बजाय पृथ्वी के घने वायुमंडल में प्रवेश करते ही घर्षण के कारण जलकर खाक हो जाएगा। इससे जमीन पर किसी भी प्रकार के नुकसान की कोई आशंका नहीं है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह आसमान में एक अत्यंत शानदार और चमकीला नजारा पेश करेगा।

कब और कैसे दिखाई देगा

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी यानी ईएसए के प्लैनेटरी डिफेंस प्रमुख रिचर्ड मोइस्ल ने इस घटना के समय के बारे में जानकारी दी है। उनके अनुसार, सीईआरएनक्यू52 के 16:00 से 16:30 यूटीसी के बीच वायुमंडल में दाखिल होने की प्रबल संभावना है। भारतीय समयानुसार यह समय रात 9:30 से 10:00 बजे के बीच होगा। उस समय ऑस्ट्रेलिया के उस क्षेत्र में अंधेरा होने की वजह से स्थानीय लोग आसमान में अचानक एक बेहद तेज चमकता हुआ उल्का यानी ब्राइट फ्लैश देख सकेंगे।

ऐसी घटनाएं दुर्लभ हैं

इस घटना की सबसे खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने इस एस्टेरॉयड को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से पहले ही पूर्व-पहचान कर लिया है। अब तक पूरे इतिहास में ऐसी घटनाएं केवल 13 बार ही दर्ज की गई हैं। जानकारी के लिए बता दें कि एटेन एस्टेरॉयड वे होते हैं जिनकी कक्षा सूर्य से औसतन धरती की कक्षा के अंदर रहती है, जबकि अपोलो एस्टेरॉयड की कक्षा धरती की कक्षा के बाहर स्थित होती है। खगोलविदों के लिए इस तरह की पूर्व-पहचान और निगरानी करना सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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