डेटिंग ऐप्स से दूरी क्यों बना रही Gen Z? प्यार तलाशने का यह नया तरीका चौंका देगा जीवनशैली 2 घंटे पहले 4
डेटिंग ऐप्स ने रिश्ते बनाने का तरीका भले बदला हो, पर अब Gen Z का एक बड़ा हिस्सा इनसे किनारा करता दिख रहा है और स्वाइप व चैट की जगह असली मुलाकातों तथा साझा रुचियों को तरजीह दे रहा है।

कुछ साल पहले तक डेटिंग ऐप्स को नए लोगों से जुड़ने और रिश्ते की शुरुआत करने का सबसे सरल जरिया समझा जाता था। मगर अब यह तस्वीर धीरे-धीरे करवट लेती नजर आ रही है। कई रिपोर्ट और सर्वे इस ओर इशारा करते हैं कि Gen Z यानी करीब 18 से 28 साल की उम्र के युवा अब डेटिंग ऐप्स को लेकर पहले जैसा जोश नहीं दिखाते। इसके उलट, वे लोगों से वास्तविक जीवन में मिलकर रिश्ते गढ़ने को ज्यादा अहमियत देने लगे हैं।

स्वाइप की थकान और सतही बातचीत

Gen Z का एक बड़ा तबका मानता है कि डेटिंग ऐप्स पर लगातार स्वाइप करते रहने की प्रक्रिया कई बार थका देने वाली बन जाती है। ढेरों विकल्प मौजूद होने के बावजूद सार्थक संवाद और लंबे समय तक टिकने वाला रिश्ता बना पाना आसान नहीं रहता। बहुत से युवाओं को यह भी महसूस होता है कि ऐप्स पर होने वाली बातचीत अक्सर ऊपरी रह जाती है और किसी को सचमुच जानने का अवसर कम मिल पाता है।

इसके साथ ही, बार-बार मैच, चैट और जवाब का इंतजार करना मानसिक रूप से भी थका सकता है। कुछ युवाओं का कहना है कि डेटिंग ऐप्स पर बने रहने से दूसरों से तुलना और असुरक्षा की भावना तक बढ़ सकती है।

अब किस तरह बन रहे हैं रिश्ते?

बीते कुछ वर्षों में “इन-पर्सन कनेक्शन” यानी आमने-सामने मिलकर रिश्ते बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। Gen Z के कई युवा अब दोस्तों के माध्यम से, कॉलेज, दफ्तर, सामाजिक आयोजनों, हॉबी क्लब्स और कम्युनिटी इवेंट्स में नए लोगों से मिलना पसंद कर रहे हैं। उनका मानना है कि असल मुलाकातों में किसी व्यक्ति की बॉडी लैंग्वेज, बर्ताव और व्यक्तित्व को कहीं बेहतर ढंग से परखा जा सकता है, जिससे रिश्ते अधिक स्वाभाविक लगते हैं।

साझा रुचियों को मिल रही प्राथमिकता

मौजूदा युवा पीढ़ी सिर्फ प्रोफाइल फोटो देखकर निर्णय लेने के बजाय एक जैसी रुचियों और मिलती-जुलती सोच वाले लोगों को तवज्जो दे रही है। बुक क्लब, फिटनेस ग्रुप, ट्रैवल कम्युनिटी, वर्कशॉप और दूसरी सामाजिक गतिविधियां ऐसे लोगों से मेलजोल का माध्यम बन रही हैं, जिनकी पसंद और जीवनशैली आपस में मेल खाती हो।

क्या डेटिंग ऐप्स का दौर ढल रहा है?

ऐसा कहना उचित नहीं होगा। आज भी लाखों लोग डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं और कई कामयाब रिश्ते वहीं से शुरू होते हैं। हालांकि Gen Z के एक हिस्से में यह सोच जरूर मजबूत हो रही है कि रिश्तों की नींव केवल स्क्रीन पर ही नहीं, बल्कि असल दुनिया में भी रखी जा सकती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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