निमाड़ का खास गेहूं के आटे का हलवा, सिर्फ 10 मिनट में तैयार होने वाली मीठी रेसिपी जानें एमपी स्टाइल में जीवनशैली एक महीने पहले 23
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में सूजी की जगह गेहूं के आटे और ड्राई फ्रूट से बनने वाला यह स्वादिष्ट हलवा सिर्फ कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाता है और 2 दिन तक खराब नहीं होता। जानिए घर पर इसे बनाने की पूरी विधि।

जब घर पर झटपट कुछ मीठा बनाने का मन हो, तो गेहूं के आटे का हलवा एक बढ़िया विकल्प साबित होता है। अक्सर लोग सूजी का हलवा ही बनाते और खाते हैं, लेकिन आटे से तैयार होने वाला यह हलवा स्वाद में उससे जरा भी कम नहीं होता। खास बात यह है कि इसे महज 10 मिनट में आसानी से बनाया जा सकता है और यह खाने में बेहद लाजवाब लगता है।

निमाड़ की पारंपरिक मिठास

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में यह हलवा रवे यानी सूजी से नहीं, बल्कि गेहूं के आटे और ड्राई फ्रूट से तैयार किया जाता है। यहां के लोगों को यह मिठाई बहुत पसंद आती है और इसे घर पर बनाकर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए गेहूं का मोटा जाड़ा आटा, देसी घी और ड्राई फ्रूट की जरूरत पड़ती है। एक और खूबी यह है कि यह हलवा 2 दिन तक खराब नहीं होता।

एक्सपर्ट की राय

इस बारे में जब एक्सपर्ट फुला बाई से बातचीत हुई, तो उन्होंने बताया कि अब तक ज्यादातर लोगों ने रवे से बना हलवा ही कई बार खाया होगा। लेकिन अगर घर पर कुछ झटपट बनाना हो, तो गेहूं के आटे से यह हलवा तैयार किया जा सकता है। उनके मुताबिक यह सिर्फ 10 मिनट में बनकर तैयार हो जाता है, खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है और इसमें ड्राई फ्रूट का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है।

बनाने की विधि

अगर आप भी घर पर गेहूं के आटे का हलवा बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले 250 ग्राम गेहूं का आटा लें और एक कढ़ाई में 200 ग्राम देसी घी डाल दें। अब इसे लगातार घुमाते रहें, जब तक यह ब्राउन न हो जाए। इसके बाद इसमें 100 ग्राम पानी मिलाकर पकने के लिए रख दें।

करीब 5 मिनट बाद इसमें 200 ग्राम काजू, बादाम और किशमिश डाल दें। साथ ही 200 ग्राम शक्कर और 200 ग्राम गुड़ भी मिलाना होगा, जिससे यह हलवा अच्छी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। पूरी प्रक्रिया में करीब 20 मिनट में यह स्वादिष्ट हलवा बनकर तैयार हो जाता है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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