रक्षाबंधन 2026: निमाड़ में खास 'चकती' के बिना अधूरी है राखी, जानें क्या है इसकी रेसिपी और परंपरा जीवनशैली एक घंटा पहले 4
मध्य प्रदेश के खंडवा समेत पूरे निमाड़ अंचल में रक्षाबंधन का पर्व पारंपरिक मिठाई 'चकती' के बिना अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं कि इस खास व्यंजन को घर में कैसे तैयार किया जाता है।

निमाड़ की परंपरा का अहम हिस्सा है चकती

आज पूरे देश में रक्षाबंधन का त्योहार बहुत उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के साथ-साथ पूरे निमाड़ क्षेत्र में राखी का उत्सव केवल भाई-बहन के अटूट बंधन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ कई पुरानी परंपराएं और खास पकवान भी जुड़े हुए हैं। निमाड़ की सबसे प्रसिद्ध मिठाई 'चकती' है, जिसके बिना यहां रक्षाबंधन का त्योहार फीका सा लगता है। राखी का समय आते ही घरों में इस पारंपरिक मिठाई को बनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। निमाड़ के लोग बाजार की मिठाई के मुकाबले घर में बनी शुद्ध चकती को अधिक प्राथमिकता देते हैं। परिवार की महिलाएं साथ मिलकर इसे तैयार करती हैं और फिर राखी के दिन घर आने वाले मेहमानों और रिश्तेदारों को बड़े चाव के साथ परोसा जाता है।

चकती बनाने की विधि और सामग्री

चकती का स्वाद अन्य मिठाइयों से काफी अलग और निराला होता है। इसे तैयार करने के लिए कुछ मुख्य सामग्रियों की आवश्यकता होती है, जिसमें रवा, आटा, मावा और चाशनी प्रमुख हैं। चकती बनाने की प्रक्रिया के मुख्य चरण नीचे दिए गए हैं:

  • सबसे पहले चीनी की चाशनी तैयार की जाती है।
  • तैयार चाशनी में अच्छी गुणवत्ता वाला मावा मिलाया जाता है।
  • मिश्रण में सही मात्रा में रवा यानी सूजी और आटा शामिल किया जाता है।
  • इस पूरे मिश्रण को धीमी आंच पर लगातार चलाया जाता है ताकि यह सही ढंग से पक जाए और इसका स्वाद व बनावट बेहतर हो सके।

नारियल का खास तड़का

चकती के स्वाद को यादगार बनाने में नारियल की अहम भूमिका होती है। जब मिश्रण पककर तैयार हो जाता है, तो उसे जमाने के लिए एक थाली का उपयोग किया जाता है। थाली में सबसे पहले घी लगाया जाता है और उसके ऊपर सूखा नारियल यानी खोपरा बिछाया जाता है। इसके बाद, तैयार गरम मिश्रण को थाली में डालकर पूरी सतह पर फैला दिया जाता है। ऊपर से दोबारा नारियल की परत डाली जाती है। मिश्रण को ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है, जिसके बाद इसे मनपसंद आकार में काटकर परोसा जाता है। मावे की मिठास और नारियल का कुरकुरापन मिलकर चकती को एक अनूठा स्वाद प्रदान करते हैं।

मेहनत और लगन से बनती है चकती

सुरंगांव जोशी निवासी पिंकी पटेल बताती हैं कि चकती बनाना कोई पांच मिनट का काम नहीं है। इसमें काफी समय और मेहनत लगती है। कई बार तो महिलाएं सबसे पहले घर पर ताजा मावा तैयार करती हैं और फिर मिठाई बनाने की प्रक्रिया शुरू करती हैं। हालांकि, इसमें काफी मेहनत लगती है, लेकिन फिर भी हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर इसे बनाने की पुरानी परंपरा आज भी कायम है। पिंकी पटेल का कहना है कि चकती केवल घर के सदस्यों के लिए नहीं होती, बल्कि यह त्योहार के दौरान आने वाले मेहमानों के स्वागत का भी एक मुख्य हिस्सा है। भाई को राखी बांधने के बाद जब बहनें यह मिठाई खिलाती हैं, तो त्योहार की खुशी कई गुना बढ़ जाती है।

बाजार की मिठाई से अलग है स्वाद

निमाड़ की चकती का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह घर की रसोई में परिवार के सदस्यों द्वारा प्यार से बनाई जाती है। हालांकि हर परिवार के इसे बनाने के तरीके में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन इसका मूल आधार रवा, आटा, मावा, चाशनी और नारियल ही होता है। आज के आधुनिक दौर में भी रक्षाबंधन पर इसे बनाने का देसी अंदाज बरकरार है। यही वजह है कि साल में भले ही यह मिठाई एक बार बनती हो, लेकिन जैसे ही रक्षाबंधन नजदीक आता है, निमाड़ के हर घर की रसोई से चकती की सोंधी खुशबू आने लगती है और हर कोई इसके स्वाद का आनंद लेने के लिए बेताब रहता है। रक्षाबंधन के दिन निमाड़ की हर थाली में इस पारंपरिक मिठाई का होना ही इस पर्व की पूर्णता दर्शाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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