जीवनशैली
19 घंटे पहले
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चलती-फिरती चक्की से बदल रही है तस्वीर
आज के दौर में मिलावटखोरी से हर कोई परेशान है, खासकर खाने-पीने की चीजों में शुद्धता की गारंटी मिलना मुश्किल हो गया है। इसी समस्या का एक नायाब समाधान कोडरमा से सामने आया है। यहां पिंटू कुमार नाम के एक व्यक्ति ने अपनी मोटरसाइकिल पर ही एक मिनी चक्की मिल फिट कर ली है। यह अनोखा स्टार्टअप शहर की गलियों में घूम-घूमकर लोगों को उनकी आंखों के सामने ताजा और शुद्ध चना सत्तू तैयार करके दे रहा है। इस तकनीक ने न केवल लोगों को मिलावट के डर से मुक्ति दिलाई है, बल्कि उनके समय और मेहनत की भी भारी बचत की है।
महज ₹30000 में खड़ा किया देसी स्टार्टअप
पिंटू कुमार की इस अनूठी मशीन के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल में मिनी चक्की का पूरा सेटअप तैयार करने में करीब ₹30000 की लागत लगाई है। यह मशीन दिखने में भले ही छोटी है, लेकिन इसकी कार्यक्षमता काफी प्रभावशाली है। पिंटू बताते हैं कि उनकी यह चलती-फिरती मिल एक घंटे में 15 से 20 किलोग्राम तक सत्तू आसानी से पीस सकती है। पिंटू रोजाना अपनी मोटरसाइकिल लेकर अलग-अलग इलाकों में निकलते हैं और ग्राहकों की मांग पर मौके पर ही सत्तू तैयार करते हैं। वे शुद्ध चना सत्तू की बिक्री 130 रुपये प्रति किलो की दर से करते हैं।
लोगों का भरोसा और समय की बचत
इस पहल की सबसे बड़ी खासियत पारदर्शिता है। ग्राहक को सत्तू के पैकेट पर निर्भर रहने के बजाय यह देखने का मौका मिलता है कि आखिर सत्तू किस चीज से बना है। पिंटू कुमार का कहना है कि लोगों का सबसे अधिक झुकाव इसी बात की ओर है कि पूरा सत्तू उनके सामने तैयार किया जाता है, जिससे मिलावट की कोई गुंजाइश नहीं बचती। पहले लोगों को अपनी सामग्री लेकर चक्की मिलों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी और वहां घंटों तक लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता था। कई बार बिजली की कटौती के कारण भी काम अटक जाता था। अब पिंटू की चलती-फिरती मिल लोगों के दरवाजे तक पहुंच रही है, जिससे ग्राहकों को लाइन में लगने की मजबूरी से भी छुटकारा मिल गया है।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बना रहा है यह छोटा सा प्रयास
यह मिनी चक्की मिल सिर्फ एक बिजनेस मॉडल नहीं है, बल्कि यह लोगों के स्वास्थ्य का भी बेहतर ख्याल रख रही है। ताजा पिसा हुआ सत्तू सेहत के लिए अधिक फायदेमंद होता है, और पिंटू इसी शुद्धता को प्राथमिकता दे रहे हैं। अपने इस छोटे से स्टार्टअप के जरिए पिंटू न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी पहुंचा रहे हैं। कोडरमा के लोग अब पिंटू की मोटरसाइकिल के इंतजार में रहते हैं, ताकि उन्हें बाजार की मिलावट से दूर बिल्कुल शुद्ध सत्तू मिल सके। इस देसी जुगाड़ ने साबित कर दिया है कि कम निवेश और नवाचारी सोच के साथ कैसे एक सफल बिजनेस खड़ा किया जा सकता है।
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