बारिश में चाय के साथ कुछ कुरकुरा खाने का है मन? निमाड़ की खास आलू-पोहा टिकिया का लें आनंद जीवनशैली 2 घंटे पहले 5
मध्य प्रदेश के निमाड़ और बुरहानपुर क्षेत्र में आलू और पोहे से बनी टिकिया बारिश के मौसम का सबसे पसंदीदा नाश्ता है। इसे बेहद कम सामग्री के साथ घर पर तैयार किया जा सकता है।

मानसून में स्वाद का तड़का

मध्य प्रदेश का निमाड़ अंचल और विशेष रूप से बुरहानपुर का इलाका अपने अनूठे खानपान के लिए जाना जाता है। जैसे ही बारिश का मौसम दस्तक देता है, यहाँ के लोगों की थाली में एक विशेष व्यंजन अपनी जगह बना लेता है, जिसे आलू-पोहा टिकिया के नाम से पहचाना जाता है। यह कुरकुरा नाश्ता न केवल घरों में बनाया जाता है, बल्कि बुरहानपुर की हर छोटी-बड़ी नाश्ते की दुकान पर भी इसका स्वाद चखने को मिलता है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस चटपटे व्यंजन का दीवाना है।

विशेषज्ञ की सलाह

इस पारंपरिक व्यंजन के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए विशेषज्ञ फूलाबाई ने बताया कि इस टिकिया की सबसे बड़ी खूबी इसकी सरलता है। इसे बनाने के लिए रसोई में मौजूद सामान्य सामग्रियों का ही इस्तेमाल होता है। इसे तैयार करने के लिए मुख्य रूप से उबले हुए आलू, पोहा, स्वादानुसार नमक, तीखी हरी मिर्च, अदरक, ताजा हरा धनिया और कुछ बुनियादी मसालों की आवश्यकता होती है। यदि आप इसे और अधिक चटपटा बनाना चाहते हैं, तो इसमें लाल मिर्च, चाट मसाला और थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर इसके स्वाद को और बेहतर किया जा सकता है।

इस प्रकार तैयार करें आलू-पोहा टिकिया

इस स्वादिष्ट नाश्ते को बनाने की प्रक्रिया बहुत ही आसान है:

  • सबसे पहले पोहे को पानी से अच्छी तरह धो लें और उसे हल्का भीगा हुआ रहने दें, ताकि वह नरम हो जाए।
  • दूसरी ओर, उबले हुए आलुओं को एक बर्तन में लेकर पूरी तरह से मैश कर लें।
  • अब इस मैश किए हुए आलू में भीगा हुआ पोहा, बारीक कटी हुई हरी मिर्च, घिसा हुआ अदरक, कटा हुआ हरा धनिया, नमक और अन्य मसाले मिलाएं।
  • सभी सामग्रियों को अच्छी तरह गूंथकर एक मिश्रण तैयार कर लें।
  • इस मिश्रण से अपने हाथों की सहायता से छोटी-छोटी और गोल आकार की टिकिया बना लें।
  • एक कड़ाही में तेल गरम करें और मध्यम आंच पर इन टिकियों को दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें।

परंपरा और स्वाद का मेल

तैयार गरमा-गरम आलू-पोहा टिकिया को आप हरी चटनी, इमली की मीठी चटनी या फिर अदरक वाली चाय के साथ परोस सकते हैं। बुरहानपुर में इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग इसे न केवल नाश्ते में खाते हैं, बल्कि लंबी यात्रा के दौरान भी अपने साथ ले जाना पसंद करते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर इसे सही तरीके से बनाकर सुरक्षित रखा जाए, तो यह करीब 24 घंटे तक खाने के लिए बिल्कुल ठीक रहती है। बारिश की फुहारों के बीच गरमा-गरम और कुरकुरी आलू-पोहा टिकिया का आनंद लेना निमाड़ के लोगों के लिए केवल एक नाश्ता नहीं, बल्कि मौसम से जुड़ी एक पुरानी खाद्य परंपरा का हिस्सा है जो आज भी उतनी ही लोकप्रिय है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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