मिथिलांचल की पारंपरिक मिठाई 'गुना मुना', शादी के बाद नई दुल्हन के स्वागत में बनाने का है रिवाज, जानें इसकी आसान रेसिपी जीवनशैली 3 महीने पहले 141
बिहार के मिथिलांचल की पारंपरिक मिठाई 'गुना मुना' नई दुल्हन के स्वागत के लिए विशेष रूप से बनाई जाती है, जो लगभग 15 से 20 दिनों तक खराब नहीं होती है।

मिथिला की अनूठी परंपरा: नई दुल्हन के आगमन पर 'गुना मुना' से मुंह मीठा कराने का रिवाज

बिहार के मिथिलांचल में मेहमाननवाजी और खान-पान की अपनी एक अलग और समृद्ध परंपरा है। इसी अनूठी संस्कृति का एक बेहद खास हिस्सा है वहां का पारंपरिक मीठा व्यंजन जिसे 'गुना मुना' कहा जाता है। आज के आधुनिक दौर में भी खास अवसरों पर इस मिठाई की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। विशेष रूप से जब शादी के बाद नई नवेली दुल्हन पहली बार अपने ससुराल आती है, तो उसके आदर-सत्कार और गृह प्रवेश के मौके पर इस पारंपरिक मिठाई को खास तौर पर तैयार करने का रिवाज है।

स्वाद के साथ लंबी शेल्फ लाइफ भी है इसकी खूबी

इस पारंपरिक पकवान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह खाने में जितनी स्वादिष्ट और लाजवाब होती है, उतनी ही टिकाऊ भी होती है। इसे बनाने के बाद आप आराम से 15 से 20 दिन तक रखकर खा सकते हैं, यह मिठाई इतने दिनों तक बिल्कुल भी खराब नहीं होती है।

गुना मुना बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

इसे तैयार करने के लिए बहुत ही साधारण और घर में आसानी से उपलब्ध रहने वाली सामग्रियों की जरूरत होती है:

  • आटा
  • गुड़
  • पानी
  • सौंफ
  • खस्ता (मोयन के लिए थोड़ा सा घी या तेल)

बनाने की आसान और पारंपरिक विधि

इसे बनाने की विधि बेहद सरल है, जिसे नीचे दिए गए तरीकों से तैयार किया जा सकता है:

  • सबसे पहले आटे में गर्म तेल या रिफाइंड तेल डालकर अच्छी तरह मोयन दिया जाता है, फिर पानी की मदद से इसे गूंथ लिया जाता है।
  • आटा गूंथने के बाद उसे थोड़ी देर के लिए ढककर छोड़ दिया जाता है ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए।
  • इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाई जाती हैं और उन्हें बेलन की तरह थोड़ा मोटा और लंबा आकार दिया जाता है।
  • अब कढ़ाई में घी या रिफाइंड तेल गर्म करें और इन तैयार आकृतियों को मध्यम से धीमी आंच पर तलें।
  • चूंकि यह मिठाई थोड़ी मोटी होती है, इसलिए इसे अंदर तक अच्छी तरह पकाने के लिए बिल्कुल धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तला जाता है।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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