बिलासपुर के देवकीनंदन चौक पर मिल रहा है बचपन का स्वाद, लोग दूर-दूर से चखने आ रहे बोईर रोटी और गुड़-बेर जीवनशैली 3 महीने पहले 117
बिलासपुर के देवकीनंदन चौक पर पप्पू ठाकुर पिछले कई सालों से पारंपरिक बोईर रोटी और गुड़-बेर बेचकर लोगों को बचपन की यादें ताजा करा रहे हैं। बेमौसम भी उपलब्ध इन खास देसी व्यंजनों की लोकप्रियता इतनी है कि रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक यहां पहुंच रहे हैं।

बचपन की यादों का केंद्र

अगर आप बिलासपुर में रहते हैं और अपने बचपन के दिनों में खाए जाने वाले देसी जायकों को फिर से महसूस करना चाहते हैं, तो देवकीनंदन चौक आपके लिए सबसे बेहतरीन जगह हो सकती है। यहां पिछले कई वर्षों से पप्पू ठाकुर बड़ी लगन के साथ बोईर रोटी, गुड़-बेर और बेर के पाउडर का पारंपरिक व्यवसाय चला रहे हैं। यह स्थान उन लोगों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है जो आधुनिक दौर की भागदौड़ में कहीं खो चुके पारंपरिक स्वाद को आज भी ढूंढ रहे हैं। यहां की खास बात यह है कि यह स्वाद केवल किसी विशेष मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि साल भर लोग यहां आकर इन चीजों का आनंद ले सकते हैं।

हर मौसम में बेर का स्वाद

आमतौर पर बेर एक मौसमी फल माना जाता है जो साल के कुछ खास महीनों में ही बाजारों में नजर आता है। लेकिन देवकीनंदन चौक पर स्थिति कुछ अलग ही है। पप्पू ठाकुर ने अपने काम को इस तरह से ढाल लिया है कि बेर का सीजन न होने के बावजूद ग्राहकों को यहां कभी खाली हाथ नहीं लौटना पड़ता। यही कारण है कि बोईर रोटी और बेर से बनी अन्य चीजों के शौकीन शहर के कोने-कोने से यहां खिंचे चले आते हैं। लोग न केवल खाने के लिए बल्कि अपने बचपन की मीठी यादों को एक बार फिर ताजा करने के लिए यहां का रुख करते हैं।

किफायती दाम और बेहतरीन जायका

इस दुकान की लोकप्रियता के पीछे यहां के किफायती दाम भी एक बड़ी वजह हैं। पप्पू ठाकुर ने अपने उत्पादों की कीमतें आम लोगों की जेब को ध्यान में रखकर तय की हैं। उनके यहां मिलने वाली बोईर रोटी की कीमत 20 रुपये प्रति पीस है। यदि कोई ग्राहक तीन पीस लेता है, तो उसे यह मात्र 50 रुपये में मिल जाते हैं। इसके अलावा, लोगों की पसंद के अनुसार बैर पाउडर और गुड़-बेर भी 50 रुपये प्रति पैकेट की दर से बेचे जाते हैं। इन वाजिब दामों के कारण यहां आने वाले ग्राहकों की संख्या हर दिन अच्छी-खासी रहती है।

रोजाना की कमाई और ग्राहकों का भरोसा

लंबे समय से इस व्यवसाय से जुड़े होने के कारण पप्पू ठाकुर ने न केवल अपना एक नाम बनाया है, बल्कि कई ऐसे नियमित ग्राहक भी बना लिए हैं जो बार-बार यहां वापस आते हैं। अपनी मेहनत के बारे में बात करते हुए वे बताते हैं कि इस पारंपरिक काम से उन्हें रोजाना लगभग 500 से 1000 रुपये तक की आमदनी हो जाती है। यह कमाई न केवल उनके घर का खर्च चलाने में मदद करती है, बल्कि इस पुरानी और लुप्त होती जा रही कला को जीवित रखने का जरिया भी बनी हुई है। बिलासपुर के देवकीनंदन चौक पर स्थित यह छोटी सी दुकान आज भी पारंपरिक छत्तीसगढ़ी स्वाद और यादों को सहेजने का एक बड़ा माध्यम बनी हुई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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